मोहाली। 1991 नूरपुर बेदी फर्जी मुठभेड़ मामला फिर से खुल गया है। मृतक के भाई परमजीत सिंह उर्फ पम्मा द्वारा दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर उच्च न्यायालय ने सीबीआई अदालत को मामले पर पुनर्विचार करने और नए आदेश जारी करने का निर्देश दिया है। आरोपी पुलिस अधिकारियों को 1 नवंबर 2025 को पेश होने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
यह मामला 21 मई 1991 को रोपड़ जिले के नूरपुर बेदी में पुलिस छापामारी के दौरान लोक निर्माण विभाग के नाविक चालक जगदीश सिंह और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या से संबंधित है। पीड़ितों में जगदीश सिंह की मां सुरजीत कौर, उनकी पत्नी बलजिंदर कौर, उनकी तीन साल की बेटी और लगभग दो महीने का उनका नवजात बेटा शामिल था। जगदीश सिंह जो तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फिरोजपुर केएस कौलधर के भतीजे थे, वह अपने परिवार के साथ आनंदपुर साहिब स्थित कौलधर के फार्महाउस में रहते थे। परमजीत सिंह ने दिसंबर 1991 में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार इंस्पेक्टर जसपाल सिंह, सब-इंस्पेक्टर बलवंत सिंह और एएसआई प्रीतम सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने फार्महाउस पर छापा मारा। जगदीश सिंह को प्रताड़ित कर उनकी हत्या कर दी गई, जबकि उनके परिवार के सदस्यों की भी हत्या कर दी गई। पुलिस ने जगदीश सिंह के शव को अज्ञात घोषित कर अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया था। छापे के दौरान हेड कांस्टेबल जसपाल सिंह की गोली लगने से मौत हो गई और एएसआई प्रीतम सिंह घायल हो गया था। पुलिस ने दावा किया कि गोलीबारी आत्मरक्षा में की गई थी। परमजीत सिंह व अन्य के खिलाफ आर्म्स एक्ट और टाडा की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पिछले कुछ वर्षों में सीबीआई ने इस मामले में चार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की हैं। तीन दशक से भी अधिक समय बाद इस मामले के फिर से खुलने से पंजाब की सबसे विवादास्पद फर्जी मुठभेड़ घटनाओं में से एक एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।