फिरोजपुर शहरी विधानसभा हलके से राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को भाजपा प्रत्याशी घोषित करने पर यहां के ज्यादातर भाजपाई कार्यकर्ता व वर्कर नाराज दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के सख्त अनुशासन को देखते हुए मजबूरी में ये सोढ़ी के साथ नजर आ रहे हैं। ये वही लोग (पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्व. कमल शर्मा ग्रुप के लोग) हैं, जो अपनी ही पार्टी के सीनियर नेता सुखपाल सिंह नन्नू (फिरोजपुर शहरी हलके के पूर्व विधायक) के साथ पिछले विधानसभा चुनाव में चले तो थे, लेकिन वोट किसी और को डलवाकर नन्नू को हार का रास्ता दिखाया था। इसीलिए फिरोजपुर के सियासी लोग सोढ़ी को अगाह कर रहे हैं कि बाबू जी धीरे चलना इस सियासी प्यार में जरा संभलना हां बड़े धोखे हैं इस राह में...।
सियासी जानकारों का कहना है कि सोढ़ी को अभी फिरोजपुर के ज्यादातर भाजपाइयों के बारे में जानकारी नहीं है, साथ तो चलते हैं, लेकिन वोट कहीं और डलवा देते हैं। यही हाल नन्नू के साथ किया था। नन्नू का सियासी कॅरिअर खत्म कर दिया है। पार्टी की नीतियों (तीन कृषि कानून) से तंग आकर नन्नू भाजपा से इस्तीफा दे चुके हैं।
जानकारों का कहना है कि यहां भाजपा टिकट के लिए दावेदारी लोकल बाडी सेल भाजपा पंजाब के इंचार्ज दविंदर बजाज, जिला प्रधान आरपी मित्तल, सीनियर नेता डीपी चंदन, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गुरपरवेज सिंह, भाजपा पंजाब के उपाध्यक्ष अभिषेक धवन व राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी ने जताई थी। हलके के गांवों व बस्तियों में जाकर गुरपरवेज ने काफी प्रचार किया, लेकिन टिकट न मिलने पर नाराज होकर घर पर बैठ गए हैं। यही हाल सभी दावेदारों का है।
फिरोजपुर में ज्यादातर कमल शर्मा ग्रुप के लोग हैं, ये नहीं चाहते कि फिरोजपुर में कोई बाहरी व्यक्ति आकर या किसी पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हो और उसे टिकट देकर उनका बॉस बना दे। इसीलिए ये लोग उस व्यक्ति के साथ चलते जरूर हैं, जिसे पार्टी ने प्रत्याशी घोषित किया है, लेकिन वोट की दिशा कहीं और मोड़ देते हैं। नतीजे निकलने पर पता चलता है कि उसके साथ क्या हुआ है। नन्नू तो अब यही कहते हैं हमें तो अपनों ने मारा गैरों में कहां दम था, अपनी किश्ती वहां डूबी जहां सतलुज दरिया में पानी कम था। नन्नू ने अपने ममदोट निवास पर लगे भाजपा का झंडा निकाल कर किसानी झंडा लगा लिया है।