2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव प्रदेश के 40 लाख से ज्यादा आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना के लाभार्थियों के लिए अड़ंगा बन गए हैं। सरकार व बीमा कंपनी के बीच चल रहे विवाद के कारण प्रदेश के 600 से ज्यादा निजी अस्पतालों का 132 करोड़ रुपये का क्लेम फंसा हुआ है। सरकारी अस्पतालों का क्लेम अलग से है।
चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद राज्य के सेहत विभाग ने आयुष्मान योजना में काम कर ही बीमा कंपनी को योजना से टर्मिनेट कर दिया है। साथ ही नई बीमा कंपनी को अभी तक योजना में शामिल नहीं किया गया है। इसका मुख्य कारण चुनाव आचार संहिता लागू होना है।
पुरानी कंपनी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि 29 जनवरी के बाद आयुष्मान योजना के तहत आने वाले केसों के क्लेम अदा नहीं किए जाएंगे। पुरानी कंपनी अभी अपनी सेवाएं दे रही हैं, जिसके तहत वह 29 जनवरी के बाद सरकारी व निजी अस्पतालों की तरफ से योजना के तहत किए जा रहे इलाज के केसों के क्लेम बना रही है, लेकिन फंड जारी नहीं किया जा रहा।
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जब तक सरकार कोई नई कंपनी को टेकओवर नहीं कर लेती है, तब तक वह राज्य में काम करते रहेंगे, लेकिन किसी भी केस का रिफंड नहीं देंगे। रिफंड देने की जिम्मेदारी केवल सरकार की होगी। अधिकारियोें का कहना है कि इसका हल अब राज्य में नई सरकार बनने के बाद ही हल होगा।
ज्यादातर निजी अस्पतालों ने काम से किया इनकार
पुराना रिफंड नहीं मिलने की सूरत में प्रदेश के ज्यादातर निजी अस्पतालों ने योजना के तहत काम करने से इंकार कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पंजाब (आईएमए) इस समस्या के हल के लिए राज्य के चीफ सेक्रेटरी से लेकर वित्तीय विभाग और सेहत विभाग के प्रिंसिपल सचिवों से कई बैठकें कर चुकी है। आईएमए लिखित तौर गारंटी मांग रहा है कि वह योजना के तहत इलाज करने के लिए तैयार है। परंतु उनके पुराने केसों के साथ मौजूदा समय में किए जाने वाले इलाज का पूरा रिफंड नई कंपनी या फिर नई सरकार बनने के बाद तुरंत उन्हें दिलाना होगा। परंतु कोई भी अधिकारी ऐसी गारंटी नहीं दे रहा है। इस कारण पिछली 29 दिसंबर से पंजाब में आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद है।
डॉक्टर बोले हमारा क्या कसूर...
कई अस्पताल तो ऐसे हैं जो चाहकर भी मरीजों का इलाज बंद नहीं कर पा रहे हैं। बठिंडा के पंजाब कैंसर अस्पताल के एमडी डॉ. अनुज बांसल का कहना है कि उनके पास मालवा क्षेत्र से ऐसे कई कैंसर बीमारी से पीड़ित मरीज हैं, जिनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत उनके अस्पताल में चल रहा है। हर सप्ताह उक्त मरीजों की कीमो होती है। ऐसे में उनका इलाज बंद नहीं किया सकता है। योजना के तहत यदि उनका इलाज नहीं किया जाता है तो मरीजों की जान को खतरा हो सकता है।
जल्द निकले समस्या का हल
गुरदेव अस्पताल के मालिक डॉ. इशाना सिंह का कहना है कि जिन मरीजों हर साप्ताहिक डायलियस होता है, उनका इलाज कैसे बंद किया जा सकता है। ऐसे में सरकार को भी चाहिए कि मरीजों और डॉक्टर दोनों की परेशानी को देखते हुए जल्द से जल्द इस समस्या का कोई ठोस हल निकाले, ताकि योजना के तहत मरीजों का इलाज होता रहे और अस्पतालों को उनका पैसा मिलता रहे।
सरकार दे लिखित में गारंटी : आईएमए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) पंजाब के वाइस प्रधान डॉ. विकास छाबड़ा का कहना है कि वह सरकार से लिखित गारंटी चाहते हैं कि राज्य में नई सरकार बनने या नई कंपनी के आने के बाद निजी अस्पतालों की तरफ से किए गए केसों के पैसे उन्हें मिल जाएंगे। लिखित गांरटी मिलने पर अस्पताल योजना के तहत काम करने के लिए तैयार हैं।
नहीं डूबेंगे किसी अस्पताल का रुपये
प्रिंसिपल सेक्रेटरी (हेल्थ) राज कुमार चौधरी का कहना है कि सभी अस्पतालों के केसों का रिफंड मिलेगा। किसी भी अस्पताल के रुपये नहीं डूबेंगे। अस्पतालों को योजना के तहत इलाज करते रहना चाहिए। इस समस्या का हल जल्द कर दिया जाएगा। इसके बाद सभी अस्पतालों का पुराना बकाया उन्हें मिल जाएगा।