पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार स्कूल के समस्त कर्मियों का वेतन व अन्य बिलों का भुगतान वित्त कार्यालय में होता है। इसमें जीपीएफ सहित सभी बिल क्लर्क बनाता था और विभाग की ओर से जारी डोंगल से नेट चलाकर बिल पास करवाने के साथ साथ हार्ड कापी पर स्कूल के प्रिंसिपल से हस्ताक्षर भी करा लेता।
स्कूल प्रिंसिपल कैश बुक में स्कूल से संबंधित कर्मचारियों के नाम देखकर ही हस्ताक्षर करता रहा। जबकि ईसीएस (इलेक्ट्रानिक क्लीयरेंस सर्विस) से मिलान नहीं किया। यही नहीं आरोपी क्लर्क राजीव कुमार ने एक फर्जी साइंस टीचर के नाम से खुद एक खाता बना रखा था। जब एक ही बार में उसके जीपीएफ खाते से 18 लाख रुपये की राशि निकालकर अपने बैंक खाते में जमा करवाई तो ऑडिट विभाग को शक हुआ।
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क्लर्क इस खाते में आने वाली पूरी सैलरी समेत सभी लाभ ले रहा था। मामला जब शिक्षा विभाग के निदेशक के ध्यान में आया तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई कर आरोपी क्लर्क के बैंक खाते सील करवा दिए। पूरे मामले में स्कूल प्रधानाचार्य की लापरवाही सामने आ रही है। वहीं वित्त कार्यालय नंगल पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, क्लर्क को अनुकंपा के आधार पर अपनी माता की नौकरी 15 सितंबर 2006 मिली थी और 9 अगस्त 2018 तक उसने इसी स्कूल में काम किया। इसके बाद उसकी बदली सरकारी स्कूल काहनपुर खुही में हो गई, बावजूद इसके 31 अक्तूबर 2018 तक सरकारी हाई स्कूल के बिल तैयार किए और वित्त कार्यालय से पास भी करवाए।
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इसका कारण यह बताया जा रहा है कि स्कूल में क्लर्क की पोस्ट न होने के कारण उसे ही बिल तैयार करने के लिए बुलाया जाता रहा। मामले की जांच कर रहे थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पवन चौधरी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि क्लर्क व स्कूल प्रधानाचार्य के खिलाफ आईपीसी की 1860 की धारा 409, 420, 465, 467, 468 व 471 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। कुल 99,27,517 रुपये का घपला हुआ है।