पंजाब चुनाव: संयुक्त समाज मोर्चा पार्टी का नहीं हो रहा पंजीकरण, चुनाव चिन्ह न मिलने से बढ़ी चिंता
Sun, 30 Jan 2022 02:30 AM IST
भूपेंद्र सिंह
विकास मल्होत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (हरियाणा)
सार
संयुक्त समाज मोर्चा को पहले प्रचार के लिए समय कम मिला। अब चुनाव चिन्ह न मिलने से पार्टी की चिंता बढ़ गई है। उम्मीदवारों के पास नामांकन के लिए सिर्फ दो दिन बचे हैं। बलबीर सिंह राजेवाल का कहना है कि सियासी पार्टियां नहीं चाहतीं कि चुनावी मैदान में उतरें।
कृषि कानून रद्द करवाने के लिए दिल्ली में डटे किसानों ने अब पंजाब की राजनीति में किला फतेह करने की ठानी है। इसके लिए किसान नेताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा के नाम से पार्टी बनाई है। किसानों को यहां राजनीति पारी खेलने के लिए कई अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
चुनाव में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ग्रुप से गठबंधन के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब में 102 सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतार दिए, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत अब यह आ रही है कि किसानों की पार्टी संयुक्त किसान मोर्चा का अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है। नामांकन के लिए सिर्फ तीन दिन बचे हैं, उसमें से भी एक सरकारी छुट्टी है। पार्टी की रजिस्ट्रेशन न होने और चुनाव चिन्ह न होने की वजह से चुनाव मैदान में प्रचार के लिए जा रहे उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ गई है।
अगर दो दिन में पार्टी पंजीकरण और चिन्ह न मिला तो उम्मीदवारों के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचता है कि वह आजाद उम्मीदवारों के तौर पर मैदान में उतरें। 22 जत्थेबंदियों ने पंजाब में चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, जिस पर कई लोगों ने उन्हें समर्थन भी दिया है।
2373 लोगों ने किया था टिकट के लिए आवेदन
संयुक्त समाज मोर्चा ने जब चुनाव में हिस्सा लेने का मन बनाया था तो उन्होंने आवेदन मांगें। इस दौरान 2373 लोगों ने आवेदन किया था और 102 उम्मीदवारों का चयन किया गया। अब सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि संयुक्त संमाज मोर्चा पार्टी का न ही पंजीकरण हुआ है और न ही कोई चिन्ह मिला है। बलवीर सिंह राजेवाल का कहना है कि हमें चुनाव में आने से रोकने के लिए सियासी पार्टियां जोर लगा रही हैं। राजनीतिक दल नहीं चाहते हैं कि वे चुनाव लड़े।
चुनाव चिन्ह न मिला तो आजाद लड़ेंगे : खारा
महानगर की नॉर्थ सीट से संयुक्त समाज मोर्चा के प्रत्याशी एडवोकेट वरिंदर खारा ने बताया कि बिना पंजीकरण और चिन्ह चुनाव लड़ने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रत्याशी पूरी तरह से चुनाव प्रचार नहीं कर पर रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं से बातचीत चल रही है। अगर सोमवार तक चिन्ह नहीं मिलता है तो आजाद प्रत्याशी के तौर पर फार्म भरकर चुनाव लड़ा जाएगा।