फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उद्यमियों ने लगाए रेगुलेटरी कमीशन गो-बैक के नारे

Thu, 10 Mar 2016 10:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
विज्ञापन
लुधियाना में पंजाब स्टेट पॉवर काम की ओर से आयोजित वैठक को संबोधित करते चेयरमैन डीएस बैंस। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पंजाब स्टेट रेगुलेटरी कमीशन की बैठक में उद्यमियों ने बिजली के रेट बढ़ाने के प्रस्ताव का जम कर विरोध किया। रेगुलेटरी कमीशन गौ बेक के नारे लगाए गए। उद्यमियों ने मीटिंग हाल में ही धरना दिया और इसके बाद बैठक का बायकाट किया। उद्यमियों ने चेतावनी दी कि किसी भी हालत में बिजली के रेट सूबे में बढ़ने नहीं दिए जाएंगे, क्योंकि पंजाब में अन्य राज्यों के मुकाबले बिजली की दरें पहले ही काफी ज्यादा हैं।
विज्ञापन


गौरतलब हो कि रेगुलेटरी कमीशन की ओर से उद्यमियों के सुझाव लेने के लिए फिरोजपुर रोड स्थति बिजली दफ्तर में बैठक बुलाई गई थी। इस दौरान चेयरमैन डीएस बैंस समेेत चीफ इंजीनियर, एक्सीएन और एसडीओ भी मौजूद रहे।
पीएसईआरसी के नवनियुक्त चेयरमैन डीएस बैंस ने लुधियाना में आयोजित पब्लिक हीयरिंग के दौरान उद्यमियों से बात करते हुए बताया कि अगले वर्ष से पावर टैरिफ 1 साल की बजाय 3 साल के लिए रिवाइज होंगे। अन अथराइज्ड़ यूज ऑफ इलेक्ट्रिीसिटी(यूयूई) कानून को लेकर उन्हें लगातार उद्यमियों की शिकायतें मिल रही हैं। इसको देखते हुए उन्होंने 14 मार्च को चंडीगढ़ में उद्यमियों की एक बैठक बुलाई है। यदि उद्यमी बेहतर ढंग से अपना पक्ष रख, समस्या को सामने ला सकें तो यकीनन कानून में बदलाव करवाया जाएगा।
विज्ञापन


शुरू में सीआईसीयू के प्रेसिडेंट अवतार सिंह व जनरल सेक्रेटरी उपकार सिंह ने पूछा कि पंजाब सरकार के दावों के मुताबिक राज्य में बिजली सरप्लस है तो बिजली टैरिफ  बढ़ाने की जरूरत क्यों आन पड़ी है। सरप्लस बिजली इंडस्ट्री को दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकारी डिपार्टमेंट्स की ओर पावरकॉम के करोड़ों रुपये बिजली के बिल के तौर पर बकाया हैं। लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, ऐसे में अगर किसी इंडस्ट्री का बिल एक दिन लेट हो जाए तो उनका कनेक्शन काट दिया जाता है। वहीं डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल नई इंडस्ट्री लगाने वालों को बिजली 5 रुपये प्रति यूनिट देने को कह रहे हैं। इस पर सवाल पैदा होता है कि पुरानी इंडस्ट्री ने क्या पाप किया है। उपकार सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि किसानों को मुफ्त बिजली देने के नाम पर सब ब्लैक एंड व्हाइट हो रहा है।

फेडरेशन ऑफ स्माल इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट बदीश जिंदल ने कहा कि पावरकॉम का गठन हुए 6 साल हुए हैं और वह 25000 करोड़ के कर्ज में डूब चुका है। ऐसे में पावरकॉम के चेयरमैन और इसके लिए जिम्मेवार अफसरों को तुरंत सस्पेंड कर देना चाहिए। उन्होंने बताया कि पावरकॉम पिछले 4 साल में 17000 करोड़ रुपये का लॉस दिखा रहा है, जबकि सरकार विज्ञापन देकर 400 करोड़ रुपये का प्राफिट होने की बात कह रही है। जिंदल ने कहा कि 25 हजार करोड़ रुपये पर बनने वाला 3209 करोड़ रुपये कस ब्याज लोगों की बजाए नालायक अफसरों से वसूला जाना चाहिए। इतना ही नहीं पावरकॉम ने अपनी अकाउंटेड रेवेन्यू रिपोर्ट्स में 2380 करोड़ रुपये अतिरिक्त परचेज करने के लिए देने को कहा है, जबकि देश भर में बिजली के दाम कम हुए हैं। जिंदल ने एग्रीकल्चर लोड की मीटरिंग न होने से टीएनडी लॉसस का पता न चल पाने पर भी सवाल उठाएं हैं।

रेट बढ़े तो होगा आंदोलन
फास्टनर्स मैन्यूफैक्चरर्स ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट नरिंदर भामरा ने चेयरमैन को स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि इंडस्ट्री मंदी के दौर से गुजर रही है। ऐसे में अगर बिजली के दाम बढ़ा दिए तो कारोबारी संघर्ष करते हुए मरने की भी परवाह नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि पंजाब बार्डर स्टेट होने के कारण रा-मैटीरियल बाहरी राज्यों से मंगवाने के चलते 4000 रुपये तक भाड़ा ज्यादा पड़ जाता है। ऐसे में बिजली 7 से घटाकर 5 रुपये प्रति यूनिट कर देनी चाहिए।

बिजली विभाग अब भी वसूल कर रहा चुंगी
जनता नगर स्माल स्केल मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान जसविंदर सिंह ठुकराल ने  पिछले समय में 100 करोड़ के कोयले के घोटाले की खबरों की कापी चेयरमैन को सौंपी। ठुकराल ने कहा कि अगर सूबा बिजली सरप्लस है तो 2010 से करोड़ों रुपये अपने पास रख कर पावरकॉम कनेक्शन जारी क्यों नहीं कर रहा। स्माल पावर सप्लाई के खपतकारों से 2014 के पावर फैक्टर के लाखों रुपये नाजायज वसूले जा रहे है तथा पूरे पंजाब में चुंगी माफ पर बिजली पर अभी भी चुंगी वसूली जा रही है। उन्होंने कहा कि इतनी धक्केशाही के बाद भी रेट बढ़ाए गए तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें