तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश और गिरते पारे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फसलों पर मौसम का प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। फसलों को बचाने के लिए किसान दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं। जिससे उनका खर्च बढ़ गया है। बारिश के चलते पीली पड़ रही गेहूं की फसल को बचाने के लिए प्रति एकड़ 1000 रुपये तक दवाओं पर खर्च आ रहा है। आलू की फसल लगभग बर्बाद हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सुधार गांव स्थित गिल फार्मस के मालिक किसान चरनजीत सिंह गिल ने बताया कि वो गेहूं और बासमती चावल की खेती के अलावा फूलों और सब्जियों के हाईब्रिड क्वालिटी बीज तैयार करते हैं। जिनको कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से कंपनी के जरिए निर्यात किया जाता है। मौसम ने जबरदस्त करवट ली है। भारी बारिश और तेज हवाओं ने गेहूं और सरसों की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है।
पीली पड़ रही गेहूं की फसल को बचाने के लिए लाइफ सेविंग दवाओं पर प्रति एकड 1000 रुपये का खर्च बढ़ गया है। इससे गेहूं के पैदावर में 25 प्रतिशत की कमी होने की संभावना है। इसके अलावा बारिश के चलते ब्रोकली और अन्य सब्जियों मे घास पैदा होने के कारण फसल बर्बाद हो रही हैं। जमीन की गुड़ाई नहीं हो पा रही है। गेंदा और कैंडीफर्स्ट फूलों के बीज निर्यात करने के लिए तैयार फसल बारिश और मौसम के चलते सूख गई। इसके अलावा मूली और चुकंदर समेत तमाम सब्जियों के बीज तैयार करने के लिए बीजी गई फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
यह घाटा जल्द उबरने नहीं देगा
किसान जुगराज सिंह गिल ने बताया कि वो 22 एकड़ जमीन में खेती करते हैं। जिसमें से 12 एकड़ में उन्होंने एक कंपनी के साथ करार कर आलू की फसल लगाई थी। रविवार को कंपनी के अधिकारी फसल का निरीक्षण करने पहुंचे। हर तीसरा आलू खराब मिला। मौसम दो चार दिन और खराब रहा तो आलू की फसल पूरी तरह खराब हो जाएगी। उसे खेतों मे जोतना पड़ेगा क्योंकि निकालने का खर्च पूरा नहीं हो सकेगा। गेहूं और अन्य फसलें अब मौसम की मार से खराब हो रही हैं।