सीएम ने विशेषज्ञों से आग्रह किया कि किसानों को शिक्षित करें, ताकि किसानों को पता रहे कि किस स्प्रे से क्या समाधान होता है। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कृषि अधिकारियों से कहा कि किसी भी नई फसल या समस्या का हल करने के लिए किसान को न कहें। किसान खुद तजुर्बा या जोखिम नहीं लेना चाहता।
यूनिवर्सिटी अपनी जमीन में रिसर्च करे और फिर किसानों को समझाए। मान ने कहा कि एफसीआई ने यह कहते हुए धान खरीदने से हाथ खड़े किए हैं कि उनके पास पांच साल का धान है। जब देश में अन्न संकट था तो धान पैदा करवाया और अब दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। सेंट्रल पूल में पंजाब सबसे ज्यादा धान देता है। अगर किसानों को धान पैदा करने से रोकना है तो केंद्र को एमएसपी देना ही होगा।
सीएम ने कहा कि विदेश भाग रहे युवाओं को अब पंजाब में रोकना ही होगा। पंजाब की जमीन खेती के लिए सबसे उपजाऊ है और विदेशी धरती की उपजाऊ शक्ति पंजाब की धरती से कहीं पीछे है। मान ने कहा कि पराली पंजाब की सबसे बड़ी समस्या है। इसके निपटान के लिए बायोगैस प्लांट लगाए जा रहे हैं। लहरागागा में एक प्लांट जल्द शुरू हो जाएगा। इस प्लांट में कुछ अड़चनें थी, जो समाप्त कर दी हैं।
एक दिन में 33 टन पराली इसमें उपयोग होगी। उन्होंने कहा कि कृषि के लिए किसान जो पालिसी कहेंगे, उस पर ही सरकार उनके साथ चलेगी। इस दौरान वहां खड़े एक किसान सुखचैन सिंह ने कहा कि पराली जलाना किसानों की मजबूरी है। अगर सरकार सब्सिडी किसानों को दे तो शायद कहीं न कहीं पराली जलाना रुक सकता है। वहीं जहां तक सीधी बिजाई की बात है तो इसका लाभ है लेकिन अभी किसानों को शिक्षित होने की जरूरत है।
तीन साल बाद मेले का आयोजन
लुधियाना में तीन साल बाद किसान मेले का आयोजन हुआ है। 2019 में किसान मेला लगा था लेकिन 2020 और 21 में कोविड के कारण किसान मेला नहीं लग सका। इस बार किसान मेले में पंजाब के युवा, कृषि और प्राकृतिक स्रोतों को बचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। किसानों को खेती के लिए प्रेरित करने के लिए गीतों की विशेष सीडी भी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रिलीज की।