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उद्यमियों की दो टूक: पंजाब विधानसभा चुनाव में सुनेंगे सबकी... करेंगे मन की, घोषणा पत्र नहीं शपथ पत्र लेंगे 

Sat, 11 Dec 2021 02:03 PM IST
निवेदिता वर्मा वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)

सार

महानगर लुधियाना में इंडस्ट्री के लिए पांच बड़े फोकल पाइंट कई दशक पहले बनाए गए थे। उसके बाद एक भी फोकल पाइंट किसी सरकार ने नहीं बनाया है। पुराने फोकल पाइंट के हालात यह है कि वहां से गुजरना भी मुश्किल है।
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लुुधियाना इंडस्ट्री। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने वोट बैंक साधने के लिए वादों की झड़ी लगा दी है। ऐसे में पंजाब की औद्योगिक नगरी लुधियाना की इडंस्ट्री पर हर किसी राजनीतिक पार्टी की नजर है। इस इंडस्ट्री से केवल वोट बैंक ही नहीं मिलता है, बल्कि चुनावी फंड का भी जुगाड़ यही से चलता है। सच यह है कि बीते डेढ़ दशक से इंडस्ट्री के साथ बड़े वादे किए गए लेकिन किसी ने पूरा नहीं किया। ऐसे में इस बार विधानसभा चुनाव से पहले प्रत्येक राजनीतिक पार्टी की बैठक में इंडस्ट्रिलिस्ट मिलने तो जा रहे है, लेकिन अपने दिल की बात नहीं खोल रहे हैं। कारोबारियों का साफ कहना है कि इस चुनाव में वह सुनेंगे हर राजनीतिक पार्टी की लेकिन करेंगे अपने मन की। कारोबारियों की यह फैसला राजनीतिक पार्टियों पर भारी पड़ने वाला है। 

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महानगर लुधियाना में इंडस्ट्री के लिए पांच बड़े फोकल पाइंट कई दशक पहले बनाए गए थे। उसके बाद एक भी फोकल पाइंट किसी सरकार ने नहीं बनाया है। पुराने फोकल पाइंट के हालात यह है कि वहां से गुजरना भी मुश्किल है। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने से पहले कारोबारियों के साथ बड़े वादे किए थे, पांच रुपये बिजली देने का सबसे बड़ा दावा किया गया था। जिसे आज तक पूरा नहीं किया जा सका है। आज भी कारोबारी नौ रुपये प्रति यूनिट बिजली चुकाने के लिए मजबूर हैं। विधानसभा चुनाव की आहट से पहले राजनीतिक दल कारोबारियों को साधने में जुटे हैं। हर राजनीतिक पार्टी का प्रमुख कारोबारियों से बैठक कर रहा है, उन्हें समस्याएं बताने के लिए कह रहे है। लेकिन इस बार कारोबारी कुछ अलग ही मूड में दिखाई दे रहे हैं। 

घोषणा पत्र मजाक बन कर रह गए
चुनाव को देखते राजनीतिक दलों ने मुफ्त मुफ्त की झड़ी लगा रखी है, इन्होंने दावों का मजाक बनाकर रख दिया है। चुनावी घोषणा पत्र महज एक ड्रामाबाजी बन गई है। इसलिए कारोबारी किसी राजनीतिक पार्टी की घोषणा पर विश्वास नहीं करेंगे। सत्ताधारियों से पूछा जाएगा कि उन्होंने पिछले किए वायदों में क्या पूरा कर दिखाया है। दूसरी पार्टियों को भी उनकी सरकार के समय किए गए वायदों को याद दिलाया जाएगा। इस बार घोषणा पत्र नहीं शपथ पत्र लिए जाएंगे। चुनाव आयोग से भी कहा जाएगा कि घोषणा पत्र में किए वायदों को पूरा नहीं करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। -विनोद थापर, प्रधान निटवियर क्लब लुधियाना

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सुनेंगे सबकी करेंगे मन की 
राजनीतिक पार्टियां हमें बुला रही है इसलिए हम हर किसी की बात को सुनने जा रहे है। लेकिन इस बार कारोबारी करेंगे अपने मन की। हर चुनाव में कारोबारियों को लॉलीपाप देने से काम नहीं चलेगा। चुनावी फंड देने के लिए इस बार किसी कारोबारी के पैसा नहीं है। हमें पांच रुपये बिजली देने का वायदा आज तक पूरा नहीं हो पाया है। जीएसटी रिफंड का पैसा आज तक कारोबारियों को नहीं मिला है। इस बार सुनेंगे सबकी करेंगे अपने मन की। - डीएस चावला, प्रधान यूसीपीएमए 

इस बार झूठे झांसों में नहीं फसेंगे 
पंजाब की होटल इंडस्ट्री के लिए किसी भी राजनीतिक दल ने आज तक कुछ नहीं किया है। चाहे सरकार ने होटल को इंडस्ट्री का दर्जा दे रखा है, लेकिन आज तक हमें किसी सरकार ने इंडस्ट्री की सुविधाएं नहीं दी है। बिजली का बिल आज भी हम कामर्शियल रेट पर भरते है। पंजाब भर में होटल इंडस्ट्री के साथ 12 लाख लोग जुड़े है। हमारी यूनियन के साथ पंजाब भर से 73 सौ होटल एवं रेस्टोरेंट जुड़े है। कोरोना महामारी के दौरान एक साल हमारा कारोबार ठप रहा, लेकिन हमें राहत के नाम पर कुछ नहीं मिला। इस बार राजनीतिक दलों के झूठे झांसों में नहीं फंसेंगे। - अमरवीर सिंह, प्रधान होटल एंड रेस्टोरेंट यूनियन पंजाब

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