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महिला मरीज की मौत से गुस्साए परिजनों ने की नारेबाजी

Sun, 11 Sep 2016 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
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प्रदर्शन - फोटो : file
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मैक्स अस्पताल में उस समय हंगामा हो गया जब हार्ट अटैक के मरीज को इलाज के दौरान सिर में ब्लीडिंग होने पर उसको  ब्रेन डैड घोषित कर वेंटिलेटर पर रख दिया। कहा गया कि मरीज के जिंदा होने के संभावना शून्य के आसपास है।
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 इसके साथ ही अस्पताल ने इलाज के नाम पर सवा दो लाख का बिल बना दिया।

महिला मरीज की मौत से गुस्साए परिजनों ने रविवार सुबह पार्षद श्याम लाल जैन के नेतृत्व में सैकड़ों मोहल्ला निवासियों के साथ मिलकर मैक्स अस्पताल परिसर में दो घंटे जमकर प्रबंधन और डॉक्टर मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने मैक्स को लूट की दुकान बताते हुए मरीज को बंधक बनाने का आरोप लगाया। 

 सूचना मिलने पर थाना कोतवाली के प्रभारी भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बाबा दीप सिंह नगर निवासी गुरमीत सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी बलजीत कौर के सीने में दर्द की शिकायत हुई तो वह उसे लेकर शुक्रवार को सिविल अस्पताल बठिंडा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को मैक्स अस्पताल में दाखिल करवाया। गुरमीत सिंह के अनुसार उनकी पत्नी बलजीत खुद चलकर मैक्स अस्पताल पहुंची। वहां पर डॉक्टरों ने उसकी इंजोग्राफी की। 
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गुरमीत सिंह के मुताबिक डॉक्टरों ने उसे बताया कि उसकी पत्नी ब्रेन डैड हो चुका है। इसे ठीक होने के महज 2 फीसदी चांस हैं। इसे ठीक होने में एक या कई साल लग सकते हैं। गुरमीत ने बताया कि तब तक उनकी पत्नी को वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टरों ने उससे कहा कि इलाज का सवा दो लाख दिए बिना ब्रेन डैड उनकी पत्नी को अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। 

उन्होंने यह भी कहा कि नहीं तो जब सरकार की तरफ से कैश लेस स्कीम के तहत सरकार की तरफ से इनके इलाज की पेमेंट आ जाएगी तभी डिस्चार्ज किया जाएगा। गुरमीत के अनुसार तब तक उसकी पत्नी की मौत हो चुकी थी। इसके विरोध में स्थानीय पार्षद श्याम लाल जैन के नेतृत्व में मरीज के परिजनों और सैकड़ों मोहल्ला निवासियों ने मैक्स अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया।

डिस्चार्ज करने के बाद तोड़ा मरीज ने दम : मेहता
मैक्स अस्पताल के जीएम ऑपरेशन सुनील मेहता का कहना है कि मरीज के दिल की एक नाड़ी बुरी तरह ब्लॉक थी। उसमें स्टंट डाला गया था। उन्होंने कहा कि मरीज के सिर के अंदर खून से बहने के चलते उनका ब्रेन डैड हो गया था। यह केवल दो फीसदी काम कर रहा था। परिवार वालों को बताकर मरीज को वेंटिलेटर के सहारे जिंदा रखा गया था।

जब तक उसकी धड़कन चल रही थी कानूनन मरीज को मृत घोषित नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि अब परिजनों के कहने पर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया है, जिसके बाद उसने दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि मरीज के परिजनों से कोई इलाज का खर्च नहीं लिया गया है, क्योंकि यह कैश लेस स्कीम के तहत इलाज था जो सरकार व बीमा कंपनी की ओर से अस्पताल को मिल जाएगा।
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