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निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों का रोष मार्च 

Sat, 09 Apr 2016 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
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लुधियाना में प्रदर्शन करते अभिभावक। - फोटो : अमर उजाला
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निजी स्कूल माफिया की ओर से शिक्षा के व्यापारीकरण और अभिभावकों के साथ की जा रही प्राइवेट स्कूलों की लूट के खिलाफ शनिवार को रोष मार्च निकाला गया। बीसीएम स्कूल शास्त्री नगर से शुरू होकर शांतिपूर्वक रोष मार्च सराभा नगर से होते हुए बीसीएम स्कूल शास्त्री नगर तक निकाला गया। इस मार्च में पेरेंट्स ने हाथों में बैनर पकड़ निजी स्कूलों की ओर से की जा रही लूट का विरोध किया।
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एसोसिएशन के सदस्य अजय भाटिया और एडवोकेट केजी शर्मा ने कहा कि प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों ने डीसी रवि भगत के आदेशों को मानने से बिल्कुल मना कर दिया है। इससे अभिभावकों को प्राइवेट स्कूलों से थोड़ी राहत मिलने की आशा भी समाप्त हो गई है। इस वजह से वह रोष मार्च निकलने के लिए मजबूर हुए हैं।

उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मांग की कि प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट शिक्षा संस्थानों को बैंकों की तर्ज पर नेशनलाइज्ड करके सभी बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा निशुल्क प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल माफिया को खत्म करने के लिए प्रदेश स्तर पर पेरेंट्स एसोसिएशन का गठन जल्द किया जाएगा।
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रोष मार्च के दौरान एडवोकेट आरके मौर्या, नीरज जैन, रजनीश कोड़ा, इशान कोटिया, संजय शर्मा, गगनदीप सिंह, नरेश बहल, नवदीप सिंह, अमित महाजन, जतिंदर कुमार, अजय धीमान, मनीष कुमार, गुरपिंदर सिंह, इंद्रपाल सिंह, सतीष भाटिया, नवप्रेम सिंह और गौरव मित्तल मौजूद रहे। 

निजी स्कूलों ने मनमानी बंद न की तो जाएंगे अदालत
लुधियाना। पेरेंट्स एसोसिएशन लुधियाना के प्रधान रजिंदर घई ने एलान किया कि अगर निजी स्कूलों की ओर सेे डीसी के आदेशों को जल्द न माना गया तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे। यहीं नहीं कोर्ट में रिट दायर की जाएगी और 420 का मामला भी दर्ज करवाया जाएगा। घई सर्किट हाउस में पेरेंट्स एसोसिएशन के साथ आयोजित मीटिंग में बोल रहे थे। 

उन्होंने कहा कि पिछले लंबेे समय से पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से निजी स्कूलों की ओर से वसूले जा रहे डेवलपमेंट चार्ज, री-एडमिशन, महंगी किताब और वर्दी आदि के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है। इसके लिए भूख हड़ताल भी की गई। सभी पेरेंट्स का सहयोग मिलने के बाद डीसी से हुई मीटिंग में 15 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया।

इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि निजी स्कूलों की तरफ से किसी तरह के कोई डेवलपमेंट चार्ज नहीं वसूले जाएंगे। पिछले साल लिए गए डेवलपमेंट चार्ज में से 30 प्रतिशत पेरेंट्स को फीस के जरिए वापस किया जाएगा। इसके अलावा एनुअल चार्ज में पांच प्रतिशत कटौती करने, किताबें व वर्दी बाहर से लेने को निजी स्कूलों में लागू करने के आदेश दिए गए।

पेरेंट्स ने भी इस पर सहमति जताई। अब निजी स्कूलों की ओर से डीसी के आदेशों को मानने से इंकार किया जा रहा है। अभी करीब 30 निजी स्कूलों की लिस्ट सामने आई है जो डीसी के आदेशों को मानने से इंकार कर रहे हैं। इसलिए सोमवार को डीसी से इस संबंध में मीटिंग की जाएगी। अगर स्कूलों ने अपनी मनमानी फिर भी बंद न की तो वह अदालत जाएंगे। 
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