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प्राइवेट ऑपरेटरों की मांग: पंजाब में निजी बसों में भी महिलाओं का मुफ्त सफर करे सरकार, माफिया कहने पर भी आपत्ति

Sat, 16 Apr 2022 05:25 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने सरकार से सवाल किया है कि प्राइवेट बसों का किराया, रूट, टैक्स सब कुछ सरकार तय करती है तो प्राइवेट बस ऑपरेटर कहां से माफिया हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार बस ऑपरेटरों को माफिया बोलना बंद करे।  
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निजी बसों में महिलाओं का किराया माफ करने की मांग। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब के प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने सरकार से मांग की है कि उनकी बसों में भी महिलाओं का किराया फ्री किया जाए। सरकार उन्हें रोडवेज और पीआरटीसी की तर्ज पर महिलाओं के किराए का भुगतान दे। कैप्टन सरकार ने महिलाओं के लिए राज्य में फ्री बस सेवा शुरू की, यह सेवा सिर्फ पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी की बसों में दी जा रही है। 

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पंजाब प्राइवेट बस ऑपरेटर्स ने शनिवार को लुधियाना में प्रेस कांफ्रेंस की। बस ऑपरेटरों ने कहा कि सरकार चाहे तो महिलाओं के किराए की राशि उनके टैक्स में एडजस्ट करे। बस ऑपरेटरों का तर्क है कि सरकार की इस योजना के कारण प्राइवेट बसों को सवारियां नहीं मिल रही हैं और प्राइवेट ऑपरेटर घाटे में चल रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि उन्हें बार-बार माफिया कहा जा रहा है जिससे उनकी प्रतिष्ठा व कारोबार को नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि प्राइवेट बसों का किराया, रूट, टैक्स सब कुछ सरकार तय करती है तो प्राइवेट बस ऑपरेटर कहां से माफिया हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार बस ऑपरेटरों को माफिया बोलना बंद करे। उनका तर्क है कि वे हर साल सरकार को 100 करोड़ रुपये का टैक्स दे रहे हैं। 

इकबाल सिंह व शुभकरण सिंह बराड़ ने कहा कि कई बस ऑपरेटर आजादी के पहले से काम कर रहे हैं और उनकी चार चार पीढ़ियां इसी कारोबार में निकल गई। अब सरकार व कुछ राजनीतिक लोग अपने फायदे के लिए प्राइवेट बस ऑपरेटरों को माफिया कह रहे हैं। जिस पर उन्हें घोर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि पंजाब में 2500 के करीब प्राइवेट बसें हैं, जिसमें से 329 बादल परिवार की हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी बस ऑपरेटर दो नंबर का काम नहीं कर रहा है।
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कोरोना काल में प्राइवेट बस ऑपरेटरों पर पड़ी मार
पूर्व ट्रांसपोर्ट मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अकाली नेताओं की बसों के परमिट रद्द किए तो उन्हें हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की फटकार लगी। जिससे साफ है कि बसें गलत तरीके से नहीं चल रही थी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से पहले बस ऑपरेटर अपना टैक्स समय पर भर रहे थे। कोरोना काल में सबसे ज्यादा प्राइवेट बस ऑपरेटरों पर मार पड़ी। उन्हें तब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने भरोसा दिलाया था कि जितनी देर 50 फीसदी सवारियों वाला नियम रहेगा उतनी देर का उनसे टैक्स नहीं लिया जाएगा। मुख्यमंत्री बदलते ही बस ऑपरेटरों को यह छूट नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि एक तो सरकार ने महिलाओं के लिए यात्रा फ्री कर दी जिसकी वजह से महिलाएं उनकी बसों में नहीं बैठ रही, जिससे उनको नुकसान हो रहा है। इस मौके पर न्यू फतेहगढ़ बस लुधियाना के सुमेर सिंह लिबड़ा, अमृत ट्रांसपोर्ट लुधियाना के गुरिंदर जीत सिंह, मालवा बस मोगा के शुभकरम सिंह बराड़, शेखूपुरिया बस सर्विस लुधियाना के इकबाल सिंह, ग्रेवाल बस लुधियाना कुलविंदर सिंह, राजगुरू बस सर्विस के गुरजीत सिंह, जुझार के गुरदीप सिंह, अंबाला बस सिंडिकेट रोपड़ के अमरिंदर सिंह और अन्य ऑपरेटर शामिल हुए।

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