जगरांव। एशिया की दूसरी सबसे बड़ी जगरांव अनाज मंडी में मार्केट कमेटी के अधिकारियों की पोल उस समय खुलती नजर आई जब महज आधे घंटे की बारिश के बाद खुले आसमान के तले पड़ी गेहूं की लाखों बोरियां बारिश में भीगती नजर आईं। अचानक हुई बारिश के कारण अनाज मंडी में पड़ी गेहूं की बोरियों को ढंकने के लिए तिरपालों का कोई इंतजाम नहीं दिखा और न ही बारिश के पानी की निकासी के कोई पुख्ता प्रबंध नजर आए।
बता दें कि जिन तिरपालों से गेहूं की बोरियों को ढकने की कोशिश भी की गई थी वह तिरपालें भी जगह-जगह से फटी हुई नजर आईं। इस कारण अनाज मंडी में पड़ी गेहूं की बोरियों को बारिश से बचाने के किए जा रहे यत्न भी नाकाम नजर आए। सरकार द्वारा भले ही 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने के चलते अनाज मंडी में 90 प्रतिशत गेहूं की आमद हो चुकी है परंतु खरीद एजेंसियों की धीमी रफ्तार भी इसका एक कारण बनी। इस कारण वीरवार महज आधे घंटे की बरसात में अनाज मंडी में पड़ी गेहूं की बोरियां भीग गईं। अचानक हुई बरसात से मंडी के आढ़ती, किसानों के साथ-साथ मंडी के मजदूरों में भी गेहूं को बारिश से बचाने के लिए जद्दोजहद होती नजर आई जो नाकाफी थी।
इस मौके पर मंडी में मौजूद आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान स्वर्णजीत सिंह गिद्दड़विंडी, सचिव प्रहलाद सिंगला, परमजीत सिंह पम्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि खरीद एजेंसियों द्वारा लिफ्टिंग की धीमी रफ्तार के चलते अनाज मंडी में गेहूं की खरीद करने अलावा मंडी में पड़ी गेहूं की बोरियों को संभालने के लिए भी उन्हें अलग से खर्च करना पड़ रहा है। रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी, बारिश के चलते मंडी में पड़ी गेहूं की बोरियों की संभाल के लिए आढ़ती किसानों के साथ-साथ मजदूर भी परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर लिफ्टिंग की रफ्तार सुस्त न होती तो आज यह स्थिति देखने को न मिलती। इस संबंधी जानकारी के लिए जब मार्केट कमेटी जगरांव के सचिव कंवलप्रीत सिंह कलसी से बात की गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अनाज मंडी में पड़ी गेहूं की फसल की खरीद अभी तक नहीं हुई है उनको ढकने की जिम्मेवारी आढ़ती की है। जिस गेहूं की फसल की खरीद हो चुकी है और उन्हें बोरियों में भरा जा चुका है उस गेहूं की फसल को संभालने की जिम्मेदारी खरीद एजेंसियों की है।