जगरांव। सतलुज किनारे अवैध रेत माइनिंग ने गरीब किसानों की ज़िंदगियों को तहस-नहस कर दिया है। शुक्रवार को किसान और ग्रामीण मजदूर यूनियन के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रधान साधू सिंह अच्चरवाल और जनरल सचिव अवतार सिंह रसूलपुर के नेतृत्व में देहात पुलिस प्रमुख डॉ. अंकुर गुप्ता से मुलाकात कर माइनिंग माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के चलते माफिया खुलेआम गरीब किसान चरणजीत सिंह की 5 एकड़ जमीन से रेत निकाल रहा है। सतलुज बांध के पास स्थित यह जमीन पूरी तरह पीड़ित किसान के नाम दर्ज है। बावजूद इसके भारी वाहनों से दिन-रात अवैध रेत निकालकर बेची जा रही है। हालिया बाढ़ के कारण खेतों में जमा रेत ने खेती को असंभव बना दिया, जिससे परिवार दिहाड़ी मजदूरी को मजबूर हो गया।
राज्य प्रधान तरसेम पीटर ने बताया कि सतलुज नदी के किनारे करोड़ों रुपये की अवैध माइनिंग की जा रही है। माफिया गरीब किसानों की जमीनों पर भी नजर गड़ा चुका है और बाढ़ पीड़ित किसान संघर्ष समिति जैसे फर्जी नामों से धंधा चला रहा है। नदी किनारों का कटाव बढ़ता जा रहा है, जिससे जान-माल को खतरा है।
सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि माइनिंग माफिया की भारी आवाजाही से जगराओं-नकोदर रोड पूरी तरह तबाह हो चुकी है। गहरे गड्ढों के कारण रोजाना सड़क हादसे हो रहे हैं और आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसान और ग्रामीण मजदूर संगठनों ने पंजाब सरकार से मांग की कि अवैध माइनिंग में शामिल माफिया और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब किसानों और आम लोगों को न्याय मिल सके और सतलुज नदी के आसपास के क्षेत्र सुरक्षित बन सकें।