एंबुलेंस को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में ड्राइवर के ठीक पीछे एक केबिन है। इसमें मेडिकल टीम के बैठने की सुविधा है। इसमें एयर कंडीशनर, स्वचलित सैनिटाइजर मशीन, एयर फ्यूरीफायर, टेस्टिंग का रिकॉर्ड रखने के लिए लैपटॉप, छोटा फ्रीज सहित कई अन्य सामान मौजूद है। इस कैबिन से दूसरी तरफ टेस्ट करने के लिए दो बड़े होल हैं, जिनके आगे दस्ताने लगे हैं।
दूसरा कैबिन संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने के लिए तैयार किया है। यहां उनके बैठने के लिए कुर्सी, एक एयर कंडीशनर, एलईडी स्क्रीन के अलावा स्वचलित सैनिटाइजर मशीन को लगाया गया है। बस के सबसे अंतिम छोर में दो बेड हैं। यहां पर मरीजों को लिटाया जा सकता है। ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था भी है। सभी उपकरणों को संचालित करने के लिए एक जनरेटर भी है।
इस मामले को लेकर डीसी वरिंदर शर्मा के मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने मोबाइल कॉल का जबाव नहीं दिया। उनके व्हाट्सएप पर भी फोटो समेत इस मामले के बारे में पूछा गया। फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है।
हमें प्रशासन ने दो बसें मुहैया करवाई थी। स्वास्थ्य विभाग इनका लगातार इस्तेमाल कर रहा है। कोरोना टेस्टिंग मोबाइल क्लीनिक और एंबुलेंस को सरकार ने सीधे प्रशासन को दिया था। इसलिए वह जिला प्रशासन के पास है। इसके संबंध में ज्यादा जानकारी जिला प्रशासन दे सकता है। डॉ. सुखजीवन कक्कड़, सिविल सर्जन लुधियाना ।