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इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म : तब सीएम ने चार माह में इंसाफ दिलाने की कही थी बात, दो साल बाद जमानत पर घूम रहा आरोपी

Tue, 09 Feb 2021 02:13 AM IST
ajay kumar कंवरपाल, संवाद न्यूज एजेंसी, हलवारा (पंजाब)
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Social Media
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नौ फरवरी 2019 की स्याह रात को चाहे पंजाब सरकार भूल चुकी हो लेकिन लुधियाना की बेटी उसका एक भी पल नहीं भूल पाई है। उस रात गांव इस्सेवाल के पास कुछ दरिंदों ने उससे सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता का कहना है कि अदालत में सरकार बनाम सादिक अली केस का नाम गूंजता है तो लगता है कि जैसे किसी ने मेरे कानों में गर्म लोहा डाल दिया हो। 

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वारदात को दो साल बीत गए लेकिन वक्त भी इन जख्मों पर मरहम नहीं लगा पाया। मन में जीने की इच्छा नहीं है। फिर सोचती हूं कि मेरी अकेली मां का क्या होगा। जब यह वारदात हुई थी तो पंजाब विधानसभा में विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता ने आरोपियों को चार माह में सजा दिलाने का एलान किया था। लेकिन दो साल बाद भी इंसाफ नहीं मिला है। 

62 सुनवाई और 28 गवाहों की गवाही के बाद स्थिति यह है कि मुख्य आरोपी जगरूप सिंह उर्फ रूपी को आसानी से जमानत मिल गई है और वह आजाद घूम रहा है। बहुत नफरत होती है। जल्द फैसले के लिए अदालत से उम्मीद लगाए बैठी हूं। जिस रात दरिंदों ने मेरी अस्मत लूटी, उस रात वह मुझे और मेरे दोस्त को जान से मारने वाले थे, मार देते तो अच्छा था। यह जिंदगी मरने से भी बदतर हो चुकी है। अब तो उस दिन का इंतजार है, जब अदालत सभी दरिंदों को उनके किये की सजा देगी।

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दुश्मन के साथ भी ऐसा न हो 

उस रात जो हमारे साथ हुआ था, हम भगवान से दुआ करते हैं कि किसी दुश्मन के साथ भी ऐसा न हो। दो साल बाद भी मेरा दिमाग सुन्न है, सभी जज्बात मर चुके हैं। इन दो वर्षों में कई लोगों ने मदद के नाम पर हमारा इस्तेमाल कर अपना मतलब निकाला है। मुख्य आरोपी को जमानत मिल चुकी है लेकिन अब मन में कोई खौफ नहीं है। अब दिलेरी के साथ मुकाबला करेंगे। उन दरिंदों को हर हाल में सजा दिलाएंगे, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। - दुष्कर्म पीड़िता का दोस्त।

यह है मामला  
नौ फरवरी 2019 की शाम को लुधियाना निवासी एक युवती और उसका दोस्त कार में घूमते हुए इस्सेवाल की तरफ निकल गए थे। रास्ते में कुछ दरिंदों ने उनकी कार को रोक लिया और दोनों को बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा। इसके बाद वे रात साढ़े आठ बजे से सुबह चार बजे तक पीड़िता से उसके दोस्त के सामने दुष्कर्म करते रहे। यही नहीं, आरोपियों ने पीड़िता के दोस्त को जान से मारने की धमकी देकर दो लाख रुपये की फिरौती मांगी। किसी तरह दोनों उनसे बचकर पुलिस स्टेशन पहुंचे और आपबीती बताई।  

ये आरोपी हुए थे गिरफ्तार 
पुलिस ने इस मामले में जगरूप सिंह उर्फ रूपी, सादिक अली, सुरमू, अजय उर्फ ललन उर्फ ब्रज नंदन, सैफी अली और एक नाबालिग के खिलाफ मामला दर्जकर उन्हें गिरफ्तार किया था। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने माना कि वे इससे पहले भी कई बार ऐसी वारदात कर चुके हैं। इसकी पुष्टि एडीजीपी वी नीरजा ने की थी। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूला था कि वे इससे पहले दुष्कर्म, लूटपाट, हत्या के प्रयास, फिरौती के 15 से अधिक कांड कर चुके हैं लेकिन मामले थाने तक नहीं पहुंचे। इसके चलते उनका हौसला बढ़ता चला गया।

इन पर गिरी थी गाज 
समय पर कार्रवाई न करने और लापरवाही दिखाने पर थाना दाखा के तत्कालीन प्रभारी राज परमिंदर सिंह को लाइन हाजिर, एडिशनल प्रभारी जरनैल सिंह को निलंबित और एएसआई विद्या रत्न को बर्खास्त कर दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में कुल 54 गवाह बनाए गए थे, इसमें 28 की गवाही पूरी हो चुकी है, जबकि तीन गवाहों को पंजाब सरकार ने सूची से हटा दिया था। अब भी मामले में 23 गवाहों की अदालत में गवाही बाकी है। 
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