पंजाब में धान की खरीद शुरू हुए बीस दिन हो गए हैं। सरकार किसानों को हर तरह की सुविधाएं देने का दावा कर रही है, लेकिन धान न तो मंडियों में बिक रहा है और न ही उसे पूरा मूल्य मिल रहा है।
खराब मौसम में बदरंग और खराब हुआ धान किसान के लिए मुसीबत बन रहा है। ऐसे में गुस्साए किसानों ने रविवार को माछीवाड़ा में अपना धान सरहिंद नहर में बहा दिया और मुख्यमार्ग पर जाम लगा दिया।
किसानों ने पंजाब किसान सभा, सीपीआई और सीपीआईएम के बैनर तले जमकर नारेबाजी की। मुख्यमार्ग दो घंटे तक जाम रहा। सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
किसानों का गुस्सा देख कर समराला के नायब तहसीलदार सुरिंदर सिंह और मार्केट कमेटी के सचिव बलजीत सिंह मौके पर पहुंचे। किसानों ने उनको ज्ञापन दिया।
आश्वासन मिलने के बाद जाम खुल पाया। धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता मनजीत सिंह, रणजीत सिंह एवं भजन सिंह ने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार एक तरफ तो पंजाब को कैलिफोर्निया बनाने के वादे कर रही है, जबकि पंजाब का किसान मंडियों में बर्बाद हो रहा है।
उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। किसान सभा ने मांग की है कि हर किसान का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने को सुनिश्चित किया जाए। किसानों को खराब हुई फसल का मुआवजा दिया जाए।
किसान सभा ने साफ किया है कि यदि सरकार ने तुरंत कोई राहत न दी तो संघर्ष और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर सुंदर लाल, संतोख सिंह, जगदेव सिंह, रविंदर सिंह और जरनैल सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।