गुरु नानक भवन में मेरा रंग दे बंसती चोला शीर्षक के अधीन रविवार को देश भर के महान क्रांतिकारियों के वारिसों का मिलन हुआ। यह समारोह अमर शहीद वेलफेयर सोसाइटी द्वारा क्रांतिकारियों की विरासत सहेजने के लिए करवाया गया था।
इस समारोह की मेजबानी शहीदी सुखदेव थापर की भतीजी संगीता नैयर और नाती विशाल नैयर ने की। इस समारोह में क्रांतिकारियों के वारिसों के साथ-साथ पठानकोट आतंकी हमले में शहीद होने वाले जाबांजों के घर वालों का भी सम्मान किया गया।
समारोह में शहीद चंद्र शेखर आजाद के भतीजे सुजीत आजाद और मंगल पांडे के परिवार से उनके पड़पौत्र रघुनाथ पांडे उपस्थित थे। इनके अतिरिक्त शहीद भगत सिंह के परिवार से भतीजे किरणजीत सिद्धू, शहीद उद्यम सिंह के परिवार से नाती सरदार ज्
ञान सिंह भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
महान क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा के पड़पौत्र उमेश ढींगरा और लाला लाजपत राय के वारिसों में से अनिल अग्रवाल के अतिरिक्त ठाकुर फूला सिंह के परिवार से उनके बेटे देशपाल राघव हाजिर थे। किरणजीत सिद्धू ने कहा कि लुधियाना में कई जत्थेबंदियां हैं, जो शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहीदी दिवस पर उनकी प्रतिमा को दूध से नहलाती हैं। आज जब उन शहीदों के परिजन लुधियाना आए हैं तो उनके स्वागत के लिए कोई जत्थेबंदी नहीं पहुंची।
सुजीत आजाद ने प्रशासन और पंजाब सरकार पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि अफसरशाही और राजनेता कुर्सी प्राप्त करने के बाद कुर्बानियां देने वाले शहीदों को भूल जाते हैं, इसका स्पष्ट प्रमाण लुधियाना के इस बलिदान समारोह में मिला। समारोह स्थल से चंद कदमों की दूरी पर जिला प्रशासन और अधिकारी कार्यरत है, लेकिन कार्यक्रम में न तो कोई सियासी नेता हाजिर हुआ और न ही प्रशासन की तरफ से किसी ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।
शहीद भगत सिंह को याद करते हुए किरणजीत सिंह संधू ने कहा कि भगत सिंह एक नाम नहीं बल्कि देश के प्रति एक सच्ची सोच थी। इस अवसर पर लोककला सभ्याचार मंच मुल्लापुर की तरफ से शहीद भगत सिंह की गाथा का मंचन किया गया। इसके अलावा नशाखोरी, कन्या भ्रूण हत्या और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर स्क्रिप्ट पेश की गई।