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गीता के इंकार से महतो परिवार में मायूसी

Mon, 26 Oct 2015 07:01 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
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पंद्रह साल बाद पाकिस्तान से गीता भारत तो लौट आई, लेकिन उसका परिवार होने का दावा करने वाले जनार्दन महतो परिवार को उसने नहीं पहचाना। गीता के इंकार से महतो परिवार मायूस है। अब सभी को डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार है। परिजनों का अभी भी दावा है कि डीएनए में सारा सच सामने आ जाएगा। गीता के परिजनों ने कुछ दिन दिल्ली में ही रहने का फैसला किया है, ताकि वे गीता से फिर मिल कर उसे पुरानी यादों के जरिए भरोसा दिला सकें।
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गीता के भाई होने का दावा कर रहे मनोज का कहना है कि सोमवार को उनको, उनके पिता जनार्दन महतो, मां और भाई से गीता को मिलवाया गया, लेकिन गीता ने किसी को नहीं पहचाना। इससे उन्हें काफी हैरानी और मायूसी हुई।
काबिलेजिक्र है कि महतो परिवार की जो फोटो पाकिस्तान भेजी गई थी, उसमें गीता ने उनको पहचान लिया था। लेकिन गीता की शादी और बेटे को लेकर महतो परिवार व गीता के अलग-अलग दावे सामने आने के बाद दुविधा पैदा हो गई थी।
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वहीं लुधियाना में खुद को गीता की छोटी बहन बता रही सुनीता और भाभी ममता पूरा दिन टीवी से चिपकीं रहीं। सुनीता ने कहा कि सोमवार सुबह से वह टीवी पर गीता की खबरें देख रही थी। फिलहाल उसके लिए यही खुशी बहुत है कि उसकी बरसों पहले खोई बहन वापस लौट आई है। बाकी जो शक है, वह डीएनए टेस्ट से दूर हो जाएंगे, और उम्मीद है कि बहन जल्द उनके पास लौट आएगी।
मनोज का कहना है कि सरकार ने परिवार के सदस्यों का डीएनए सैंपल पहले ही ले लिया था। सोमवार को गीता का भी सैंपल डाक्टरों की टीम ने लिया है। अब इन सैंपलों को मैच किया जाएगा। रविवार को उसके भाई विनोद और मनोज लुधियाना से दिल्ली रवाना हुए थे। विनोद ने कहा कि वह अपनी बहन का स्वागत करने जा रहे हैं।
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