पंजाब के किसान को गेहूं धान फसल चक्र से निकालने के लिए हर स्तर पर चौतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने भी राजमा की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। जिले में 28 एकड़ रकबे में राजमा की खेती शुरू की गई है। यदि यह ट्रायल कामयाब रहा तो इसे बढ़ावा दिया जाएगा।
एडिशनल मुख्य सचिव सुरेश कुमार ने राजमा की खेती का जायजा लेने के लिए खन्ना के नजदीकी गांव भादला का दौरा किया। उनके साथ डीसी रवि भगत भी थे। उन्होंने कहा कि विविधिकरण में राजमा अहम भूमिका निभा सकता है।
मुख्य कृषि अधिकारी सुखपाल सिंह सेखों का दावा है कि राजमा की फसल काफी फायदेमंद है। इस पर प्रति एकड़ दस हजार रुपये खर्च आता है। किसान एक फसल से आसानी से 40 हजार रुपये प्रति एकड़ की कमाई कर सकता है।
इस फसल को तैयार होने में महज नब्बे दिन का वक्त लगता है। घरेलू मांग पूरी करने के लिए फिलहाल राजमा का आयात चीन और अन्य देशों से किया जा रहा है। कुल आयात के अस्सी फीसदी से अधिक राजमा सिर्फ पंजाब में ही खपत हो जाते हैं। यदि किसान यह फसल पैदा करके पंजाब में ही बेचे तो उनको बड़ा लाभ हो सकता है। लुधियाना में इस वक्त गांव भादला नीचा, शेरपुर कलां, ढिलवां, दियालपुर, साहिबपुरा, बहादुरके और बस्सियां के खेतों में इसको पैदा किया गया है।
डीसी रवि भगत ने कहा कि अमृतसर तैनाती के दौरान उन्होंने वहां भी राजमा की खेती शुरू कराई थी। अब अमृतसर में एक कनाल से शुरू की गई खेती तीन साल में बढ़कर 650 एकड़ तक पहुंच गई है। डीसी ने कहा कि पंजाब में पैदा होने वाला राजमा विटामिन के से भरपूर होता है, जो कैंसर जैसी बीमारी से मुकाबला करने में समर्थ है। इसे पानी की काफी कम जरूरत रहती है, नतीजतन जमीनी पानी के गिरते स्तर को बचाने में भी इससे सहायता मिलेगी।
एडिशनल मुख्य सचिव सुरेश कुमार ने कहा कि राजमा की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 50 फीसदी सब्सिडी योजना शुरू करने के बारे में भी प्रस्ताव लाया जाएगा।