संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। केंद्र सरकार के प्रस्तावित बीज बिल का किसान संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने आरोप लगाया कि सरकार कुछ कथित संगठनों के माध्यम से बिल पर सहमति लेने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ये संगठन वास्तविक किसान आंदोलन का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
लक्खोवाल ने बताया कि किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने बीज और बिजली बिल न लाने का लिखित फैसला किया था। इसके बावजूद अब बीज बिल दोबारा लाने की तैयारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबाव में काम कर रही है। इससे किसानों को सीधा नुकसान होगा। पारंपरिक बीजों का इस्तेमाल मुश्किल हो जाएगा। कंपनियां बीज की कीमतें मनमानी ढंग से तय कर सकती हैं। इससे खेती की लागत में भारी बढ़ोतरी की आशंका है। लक्खोवाल ने फसल खराब होने पर मुआवजे के सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियां कानूनी लड़ाई लड़ सकती हैं, जबकि आम किसान के लिए यह आसान नहीं होगा। किसान नेता ने राज्यों के अधिकार छीनने के प्रयास पर भी चिंता जताई। उन्होंने बीजों में जेनेटिक बदलाव और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। लक्खोवाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार बिल वापस नहीं लेती तो देशभर के किसानों को लामबंद कर आंदोलन किया जाएगा।