सिविल अस्पताल में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब अस्पताल में अफवाह फैल गई कि कोरोना पॉजिटिव मरीज का शव बदल गया है। जिसके बाद पूरा सिविल प्रशासन हरकत में आ गया। बाद में पता चला कि शव पटियाला से आया है और जो व्यक्ति शव लेकर आए हैं वह खुद ही पहचान करने के बाद पिता का शव लाया है।
लुधियाना पहुंचने पर पता चला कि शव उनके पिता का नहीं बल्कि किसी और का है। अस्पताल प्रशासन ने पटियाला के राजिंदरा अस्पताल से क्लीयर किया तो पता चला कि व्यक्ति खुद ही शव लेकर लुधियाना पहुंचे हैं। जिसके बाद परिजनों ने माफी मांगी और शव लेकर वापस पटियाला पहुंचे। बात स्पष्ट होने के बाद मोर्चरी में तैनात सभी ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार बस्ती जोधेवाल के न्यू सुभाष नगर निवासी वरिंदर सिंह के पिता इंद्रजीत सिंह (62) को शुगर की बीमारी थी। 22 जुलाई को उसके पिता की तबीयत खराब हुई और वह सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां से उनकी हालत को देखते हुए राजिंदरा अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां उनका कोरोना टेस्ट लिया तो रिपोर्ट पाजिटिव आ गई।
28 जुलाई को उनके पिता की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि वरिंदर पिता इंद्रजीत सिंह का शव पहचान कर लुधियाना ले आए और शव सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। इसके बाद जब वह शव उठाने मोर्चरी पहुंचा तो कर्मचारियों ने शिनाख्त कराई तो वह बोला कि शव उनके पिता का नहीं है।
इसके बाद मामला बिगड़ गया और शव बदले जाने की अफवाह फैल गई। जब अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों को पता चला तो उन्होंने पटियाला बात की और डाक्टर्स ने कहा कि वह शव पहचान कर ले गए हैं। बाद में स्पष्ट हुआ कि वह अपने पिता की जगह किसी अन्य का शव उठा लाए हैं।
मोर्चरी में तैनात डॉ. रोहित को पता चला तो उन्होंने पटियाला के डाक्टरों से बात की और सारी जानकारी दी। वहां के डाक्टरों ने फोटो भेजी और जांच में पता चला कि वरिंदर अपने पिता की जगह किसी अन्य का शव उठा लाया है। जिसके बाद वरिंदर और उसके भाई ने गलती मानी और लिखित में माफी मांगकर जान छुड़ाई।
इसके बाद परिजनों को तुरंत पटियाला भेजा गया, ताकि वह शव छोड़ कर अपने पिता का शव लुधियाना ला सकें। पटियाला के राजिंदरा अस्पताल के डाक्टर दीप ने कहा कि शव पहचान करवाने के बाद ही दिया जाता है, शव दिखाते हुए फोटो क्लिक की जाती है। इसके अलावा लिखित में भी लिया जाता है। परिजनों ने खुद ही यह गलती की है।