पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के आरोपी पंजाब पुलिस के बर्खास्त डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी हाईकोर्ट की ओर से सोमवार को जारी वारंट के बाद हुई है। हाईकोर्ट ने लुधियाना पुलिस कमिश्नर को आदेश जारी किया था कि सेखों और उनके साथी प्रदीप शर्मा को जल्द गिरफ्तार किया जाए।
शर्मा की देर रात तक गिरफ्तारी नहीं हुई थी। बर्खास्त डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों ने कुछ दिन पहले एक प्रेसवार्ता की थी। इसमें उन्होंने हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ गलत टिप्पणी की थी। उसके बाद उन्होंने टिप्पणी के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए थे।
पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि सेखों को मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा। बलविंदर सिंह सेखों पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु के साथ विवाद के बाद चर्चा में आए थे, जिसके बाद सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था। वह लगातार आशु के खिलाफ बोलते रहे हैं।
नशे से जुड़ी याचिका की सुनवाई में देरी पर की थी टिप्पणी
बर्खास्त डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों ने पंजाब में बढ़ रहे नशे को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें सीनियर पुलिस अधिकारियों के साथ साथ कई नेताओं के नाम लिखे थे। सेखों का कहना था कि अदालत की ओर से इस मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही। दो दिन पहले भी केस की सुनवाई थी, जिसमें अदालत ने तारीख 28 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी थी। इसके बाद बर्खास्त डीएसपी ने केस की सुनवाई कर रहे जजों के खिलाफ अभद्र शब्दावली का इस्तेमाल किया था।
असीमित नहीं अभिव्यक्ति का अधिकार : हाईकोर्ट
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बर्खास्त डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों व उनके साथी को गिरफ्तार करने के आदेश जारी करने के साथ कहा कि संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, लेकिन यह असीमित नहीं है। आम तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए हम दखल नहीं देते हैं लेकिन यहां पर न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से प्रेस वार्ता कर इसे सोशल मीडिया पर डाला जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि सेखों और प्रदीप शर्मा ने इरादतन न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है और ऐसे में दोनों को हिरासत में लेना जरूरी है।
वीडियो में इस प्रकार की टिप्पणियां की गई हैं जिन्हें आदेश में लिखवाया भी नहीं जा सकता। कुछ वीडियो में तो जजों की तुलना इस तरह से की गई है जिसे मार्यादित नहीं कहा जा सकता। ऐसे में लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया गया कि वे इन दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करें। साथ ही एक पत्रकार के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किया गया है।
सोशल मीडिया से सामग्री हटाने के आदेश
हाईकोर्ट ने फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि जजों को लेकर की गई टिप्पणियों वाली वीडियो सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हटाई जाएं। वीडियो को हटाने के बाद इस बारे में अदालत को भी सूचित करना होगा।