हादसे के बाद मलबे से निकाले गए मुजाहिद ने बताया कि उसका भाई शमशूल अभी अंदर दबा हुआ है। वह लेंटर उठाने का काम करते हैं। सोमवार को सुबह चार बजे जैक के जरिये लेंटर को ऊपर उठाया जा रहा था। अचानक पहली मंजिल की छत गिर गई। वह किनारे पर था, इसलिए थोड़ा मलबा ही उस पर गिरा और लोगों ने उसे बाहर निकाल लिया। वहीं मलबे से निकले जिबरैल और मोहम्मद ने रोते हुए बताया कि वह पूरी तरह घबराए हुए हैं, क्योंकि किसी तरह मौत से बचकर निकले हैं। सुबह के वक्त चालीस से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। अभी कुछ और अंदर फंसे हैं, जिन्हें निकाला जाना है।
प्रशासन को भी पुख्ता जानकारी नहीं है कि कितने लोग काम कर रहे थे और कितने मलबे में फंसे हैं। एनडीआरएफ की टीमें मलबा हटाकर फंसे हुए लोगों की तलाश कर रही हैं। सभी टीमें तेजी से काम कर रही हैं। इस मामले में फैक्टरी मालिक और ठेकेदार के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्जकर लिया है। - वरिंदर शर्मा, डीसी लुधियाना।
यह इमारत लगभग 15 साल पुरानी है। उस समय इसका नक्शा पास हुआ था या नहीं, इसकी जांच चल रही है। किसी भी इमारत की छत बदलने के लिए नगर निगम से परमिशन लेना जरूरी है लेकिन इमारत के मालिक जसविंदर सिंह ने किसी तरह की परमिशन नहीं ली थी। -सतीश कुमार, असिस्टेंट टाउन प्लानर, नगर निगम, लुधियाना।