धमकियां मिलने के कारण पिछले सवा तीन माह से घर में ही पुलिस ने कर रखा है नजरबंद
किसी तरह से सुरक्षा कर्मचारी मनाकर ले गए दोबारा घर, पुलिस से की रिलीज करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। कट्टरपंथियों के खिलाफ बयान देकर सुर्खियों में आने और गैंगस्टरों की धमकियां मिलने के बाद सवा तीन माह से घर में ही नजरबंद किए कांग्रेसी नेता गुरसिमरन सिंह मंड का रविवार को आखिरकार सब्र बांध टूट ही गया। रिश्तेदार की अंतिम अरदास में पुलिस द्वारा न जाने की इजाजत देने के बाद कांग्रेसी नेता गुरसिमरन सिंह मंड अपनी सुरक्षा छोड़ कर अकेले ही घर से निकल गए और कहा कि अगर पुलिस का व्यवहार उसके साथ ऐसा ही रहा त वह कमिश्नरेट छोड़ कर जा रहे है। गुरसिमरन सिंह मंड के अकेले घर से निकलने पर सुरक्षा कर्मचारी भी पीछे पीछे भागे और ड्राइवर गाड़ी लेकर उन्हें गाड़ी में में बैठने की मिन्नतें करने लगा। इस दौरान मंड ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की और कहा कि पुलिस उनके और उनके परिवार के साथ धक्केशाही कर रही है। वह किसी की गोली से मरे चाहें न मरे भूखे जरूर मर जाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके सुरक्षा कर्मचारी उनके साथ धक्केशाही करते है और उनका कहना बिल्कुल भी नहीं मानते। वह उनके आने जाने की हर सूचना लीक करते है।
कांग्रेसी नेता गुरसिमरन सिंह मंड ने कहा कि पिछले सवा तीन महीने से उन्हें घर में पुलिस की तरफ से बिना बात के नजरबंद किया हुआ है। उन्हें गैंगस्टरों से धमकियां मिली और उसके बाद उन्हें उनकी जान को खतरा बता घर में ही डाल दिया। उनका पूरा कारोबार बंद पड़ा है। वह किसी रिश्तेदार के सुख दुख में नहीं जा पाते। परिवार को कहीं जाने की इजाजत नहीं दी जाती। मंड ने आरोप लगाया कि अमृतपाल अपने हथियारबंद साथियों के साथ थाने पर हमला कर रहा है। उसके साथियों को पुलिस छोड़ रही है और उसे घर में बंद कर रखा है। धमकियां तो कई लोगों को मिली है, लेकिन बंद सिर्फ उन्हें किया गया है। मंड ने दो पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि दो अधिकारी उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे। रविवार को उनके रिश्तेदार की अंतिम अरदास घर से करीब सात सौ मीटर दूर था। वहां जाने की इजाजत मांगी तो वहां जाने नहीं दिया। अगर पुलिस को यहीं व्यवहार करना है तो वह कमिश्नरेट का इलाका छोड़ देंगे। उन्हें जानबूझ कर परेशान किया जा रहा है। जिस पर सुरक्षा कर्मचारी उन्हें मनाने में लगे रहे तो मंड सड़क पर ही लेट गए और नारेबाजी करने लगे। किसी तरह से सुरक्षा कर्मचारी उन्हें घर वापिस लाए। गुरसिमरन सिंह मंड ने कहा कि अगर उन्हें सोमवार को आजाद नहीं किया गया तो मंगलवार की सुबह वह अपने घर की चाबियां पुलिस कमिश्नर को दे देंगे ताकि वह जो दिल आएं उनके और उनके परिवार के साथ करें।