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केंद्रीय फंड से अपग्रेड होंगे छोटे उद्योग : मुनियप्पा

Tue, 15 Oct 2013 10:20 PM IST
अमर उजाला, लुधियाना
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लुधियाना में केंद्रीय माइक्रो, स्माल, मीडियम एंटरप्राइज (एमएसएमई) राज्य मंत्री केएच मुनियप्पा ने साफ किया है कि छोटे उद्योगों को अपग्रेड करने के लिए केंद्र की क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम में यदि पंजाब सरकार प्रस्ताव बनाकर भेजे तो उसे एक माह में मंजूर किया जाएगा।
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 इस स्कीम के तहत उद्यमी सीधे नहीं, बल्कि राज्य सरकार के जरिए ही लाभ ले सकते हैं। हर साल क्लस्टर डेवलपमेंट स्कीम के तहत तमिलनाडु से 12, गुजरात से सात और मध्यप्रदेश से पांच प्रस्ताव मिल रहे हैं। हैरत की बात है कि पंजाब सरकार कोई भी प्रस्ताव नहीं भेज रही है।

अब तक सिर्फ  मोहाली में स्थित एक क्लस्टर का प्रस्ताव मिलने पर मंजूरी दी गई है। छोटे उद्योगों को सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी से राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री से बातचीत की जाएगी।
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राज्य मंत्री केएच मुनियप्पा ने यह खुलासा मंगलवार को यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (यूसीपीएमए) परिसर में एमएसएमई उद्यमियों की बैठक में किया। मुनियप्पा ने साफ किया कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पंजाब के छोटे उद्योगों की बहुत चिंता है।

उन्हीं के निर्देश पर उद्यमियों की समस्याएं जानने, समझने और समाधान तलाशने के लिए वह केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के साथ लुधियाना पहुंचे। मुनियप्पा ने कहा कि तिवारी और अन्य मंत्रियों के साथ सलाह मशविरा करके छोटे उद्योगों के लिए रणनीति शीघ्र तैयार की जाएगी।

मुनियप्पा ने माना कि सस्ते विदेशी आयात से छोटे उद्योगों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भी पीएम से बात की जाएगी। छोटे उद्योगों के लिए तकनीकी ट्रेनिंग सेंटर खोलने के लिए विश्व बैंक के साथ बातचीत की जाएगी।
 
विदेशों का सस्ता आयात बन रहा मुसीबत
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने माना कि चीन समेत अन्य देशों से आ रहा सस्ता आयात मुसीबत बन रहा है। लेकिन आर्थिक उदारीकरण के दौर में विश्व से नाता तोड़ना मुश्किल है। हां, सस्ते आयात के हानिकारक असर को कम करने के प्रयास अवश्य किए जाएंगे।

तिवारी ने कहा कि लघु उद्योगों की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर है। इससे पहले होजरी, साइकिल, हैंड टूल्स, फास्टर, स्यूईंग मशीन, मशीन टूल्स, निटिंग, गारमेंट, ऑटो पार्ट्स समेत शहर के तमाम उद्योगों से जुड़े औद्योगिक संगठनों ने समस्याओं से संबंधित एमएसएमई मंत्री को कई ज्ञापन सौंपे।

इन ज्ञापनों में सस्ते आयात की चिंता, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर, महंगा ब्याज, बिना को-लेटरल कर्ज लेने में दिक्कतें, उत्पादन लागत में इजाफा, कुशल मैनपावर की कमी, प्रदर्शनी केंद्र की दरकार, एक समान कर नीति, छोटे उद्योगों के लिए अलग से नीति, केंद्रीय प्रोत्साहन स्कीमाें का सीधा लाभ समेत समस्याओं की झड़ी लगा दी।

 इस अवसर पर एससी रल्हन, चरणजीत सिंह विश्वकर्मा, अजीत लाकड़ा, राजिंदर भूषण मैनी, वरिंदर कपूर, जोगिंदर कुमार और अवतार सिंह भोगल समेत बड़ी संख्या में उद्यमी मौजूद रहे।
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