पंजाब में लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार अपनी जीत के लिए अलग-अलग तरीकों से जोर लगा रहे हैं, वहीं इस मुहिम में प्रचार सामग्री भी खूब इस्तेमाल हो रही है। ऐसे में प्रिंटर्स के पास चुनाव सामग्री बनाने के काफी ऑर्डर हैं और इनको पूरा करने के लिए दिन रात काम चल रहा है।
प्रिंटर्स के पास एक ही छत के नीचे सभी दलों की प्रचार सामग्री तैयार की जा रही हैं। पर्यावरण को लेकर जागरूकता के चलते अब अधिकतर प्रचार सामग्री इको फ्रेंडली तैयार की जा रही है, इसमें प्लास्टिक के उपयोग को बिलकुल बंद कर दिया गया है और सिर्फ कपड़ा एवं कागज का ही ज्यादातर उपयोग हो रहा है। इसमें हजारों श्रमिक काम कर रहे हैं। प्रचार सामग्री में पार्टियों के झंडे, पोस्टर, बैनर, स्टीकर, फ्लेक्स, बिल्ले, मफलर, पंफलेट इत्यादि खास तौर पर तैयार किए जाते हैं। लुधियाना से यह प्रचार सामग्री उत्तर भारत के कई राज्यों को भेजी जा रही है।
लुधियाना में एक ही जगह सभी राजनीतिक दलों के पोस्टर, बैनर एवं झंडे नजर आते हैं। तरुण प्रिंटर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीण चौधरी कहते हैं कि राजनीतिक दल चुनाव प्रचार सामग्री बनवा रहे हैं, लेकिन साल दर साल यह बाजार सिकुड़ रहा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पंजाब का बाजार लगभग 500 करोड़ का था, जो अब आधा रह गया है।
चुनाव आयोग की सख्ती और उम्मीदवारों में चुनाव आचार संहिता का डर इसका मुख्य कारण है। अभी चुनाव प्रचार सामग्री का उपयोग ज्यादातर रोड शो, मेगा रैलियों और डोर टू डोर कैंपेन में ही हो रहा है। अब बड़ी रैलियों की संख्या में भी कमी आ रही है। इसके अलावा प्रचार सामग्री का उपयोग वैसे भी काफी कम हो गया है। सोशल मीडिया के बढ़ते ट्रेंड ने भी इस कारोबार पर चोट की है।
महंगाई का भी असर
प्रवीण चौधरी ने कहते हैं कि उन्होंने सूबे के तमाम जिलों के अलावा राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों में भी राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों की प्रचार सामग्री बना कर भेजी है। उन्होंने कहा कि इस धंधे में गरीब लोगों को पहले काफी रोजगार मिलता था, लेकिन अब वह धीरे धीरे कम हो रहा है। उनका कहना है कि महंगाई का असर भी चुनाव सामग्री पर देखने को मिल रहा है। पिछली बार के मुकाबले इस बार कीमतें भी दस से बारह फीसदी तक बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों के बावजूद अगले 25 दिन तक चुनाव सामग्री बनाने का काम अपने चरम पर रहेगा।