पुलिस ने एक ब्लाइंड एफआईआर को क्वालिटी जांच के जरिये बेहतरीन ढंग से पैरवी करते हुए दिन-रात एक कर दिया। फोन रिकॉर्डिंग, डीएनए मैपिंग मोबाइल रिकार्ड्स, वाहनों और आरोपियों के फुटप्रिंट्स के मिलान से लेकर आवाज के सैंपल को सही सिद्ध करने में पुलिस, सीएफएसएल, सेहत विभाग सहित सभी ने कड़ी मेहनत से काम किया है। सरकार द्वारा नियुक्त सरकारी वकील बी डी गुप्ता का काम भी सराहनीय रहा है।
मुकदमे की जांच बेहतरीन ढंग से की गई
लुधियाना के मौजूदा डीसीपी और तत्कालीन एसएसपी जिला ग्रामीण पुलिस वरिंदरपाल सिंह बराड़ ने कहा कि इस फैसले से उन्हें बहुत सुकून मिला है। वे जब-जब पीड़िता से मिलते थे और उस रात की घटना के बारे में सोचते थे, उन्हें बेहद अफसोस होता था। उनकी पूरी टीम ने इस मुकदमे की बहुत बारीकी से जांच की और छोटे से छोटे सुबूत को भी नजरअंदाज नहीं किया। उनकी टीम ने पीड़िता, उसके दोस्त और मुख्य गवाह की सुरक्षा भी हमेशा कायम रखी। डीसीपी बराड़ ने कहा कि यह फैसला सभी महिलाओं में सुरक्षा की भावना पैदा करने वाला है।
फैसले से बेहद खुश हूं
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सीनियर एडवोकेट रीटा कोहली ने कहा कि वह स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले से बेहद खुश और संतुष्ट हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि आरोपियों को मिसाली सजा मिलेगी। गौरतलब है कि एडवोकेट रीटा कोहली ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रुपी की जमानत रद्द करवाने के लिए मुफ्त में मुकदमा लड़ा था।
पीड़िता के दोस्त ने कहा कि इन तीन वर्ष में उसने कभी कोई त्योहार नहीं मनाया। खासकर फरवरी माह जब सभी युवा वेलेंटाइन के दिन सेलिब्रेट करते हैं तब वह सारी दुनिया से कटकर रहता है। बस हमेशा दिल और दिमाग में एक डर रहता है कि आरोपी अदालत से बचकर तो नहीं निकल जाएंगे। उसे बहुत लोग कहते कि आरोपी बच जाएंगे, उसका हौसला डगमगा जाता। सोमवार को भी अदालत आने से पहले उसे घबराहट हो रही थी लेकिन हौसला करके आ गया। अदालत के फैसले ने उसके हौसले को बुलंद किया है। भविष्य में दृढ़ता से लड़ाई जारी रहेगी।