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पंजाब: इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म केस में सभी आरोपी दोषी करार, चार मार्च को सुनाई जाएगी सजा

Tue, 01 Mar 2022 02:42 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

थाना दाखा में 10 फरवरी को मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने एक हफ्ते में सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। 11 अप्रैल 2019 को मुकदमे का चालान पेश कर दिया गया था।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब सहित पूरे देश को हिलाकर रखने वाले गांव इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म मामले में आखिरकार तीन साल बाद जिला अदालत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सभी छह आरोपियों को दोषी करार दिया। तीन साल की लंबी लड़ाई लड़ने वाली पीड़िता को आखिरकार न्यायालय ने इंसाफ दिया। अब इस मामले में दोषियों को चार मार्च को सजा सुनाई जाएगी। 

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छह दोषियों में एक नाबालिग भी शामिल है। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज रश्मि शर्मा ने सोमवार दोपहर बाद अपने फैसले में मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रुपी, सादिक अली, सैफ अली, सुरमु, अजय उर्फ लल्लन उर्फ ब्रिज नंदन और एक नाबालिग को दोषी करार दिया। उनकी सजा का एलान चार मार्च को होगा। सभी आरोपियों को धारा 341, 427, 364 ए, 342, 354, 354 बी, 376 डी, 411, 379, 411, 34 आईपीसी और 66 ई आईटी एक्ट में दोषी करार दिया गया है। जबकि धारा 397 को 395 में तब्दील कर दिया गया है। 

भारी सुरक्षा के बीच सोमवार को लुधियाना सेंट्रल जेल से नाबालिग सहित सादिक अली, सैफ अली, सुरमु और अजय उर्फ लल्लन उर्फ ब्रिज नंदन को अदालत में पेश किया गया। जबकि जमानत पर चल रहा मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रुपी परिवार सहित खुद अदालत पहुंचा। अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रुपी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कोरोना महामारी के चलते पिछली तारीखों पर पांच आरोपियों को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये ही सेंट्रल जेल से पेश किया जाता रहा है लेकिन सोमवार को फैसला सुनाने के दिन सभी को अदालत में लाया गया था। 
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फैसला ऐतिहासिक: पीड़िता के वकील
पीड़िता के वकील एडवोकेट हरदयालइंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक है। एडवोकेट ग्रेवाल ने कहा कि सभी विभागों के सामूहिक प्रयास और मेहनत से आरोपी अपने अंजाम तक पहुंच गए हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि चार मार्च को सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाएगी। 

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पुलिस ने एक ब्लाइंड एफआईआर को क्वालिटी जांच के जरिये बेहतरीन ढंग से पैरवी करते हुए दिन-रात एक कर दिया। फोन रिकॉर्डिंग, डीएनए मैपिंग मोबाइल रिकार्ड्स, वाहनों और आरोपियों के फुटप्रिंट्स के मिलान से लेकर आवाज के सैंपल को सही सिद्ध करने में पुलिस, सीएफएसएल, सेहत विभाग सहित सभी ने कड़ी मेहनत से काम किया है। सरकार द्वारा नियुक्त सरकारी वकील बी डी गुप्ता का काम भी सराहनीय रहा है।
  
मुकदमे की जांच बेहतरीन ढंग से की गई
लुधियाना के मौजूदा डीसीपी और तत्कालीन एसएसपी जिला ग्रामीण पुलिस वरिंदरपाल सिंह बराड़ ने कहा कि इस फैसले से उन्हें बहुत सुकून मिला है। वे जब-जब पीड़िता से मिलते थे और उस रात की घटना के बारे में सोचते थे, उन्हें बेहद अफसोस होता था। उनकी पूरी टीम ने इस मुकदमे की बहुत बारीकी से जांच की और छोटे से छोटे सुबूत को भी नजरअंदाज नहीं किया। उनकी टीम ने पीड़िता, उसके दोस्त और मुख्य गवाह की सुरक्षा भी हमेशा कायम रखी। डीसीपी बराड़ ने कहा कि यह फैसला सभी महिलाओं में सुरक्षा की भावना पैदा करने वाला है।
 
फैसले से बेहद खुश हूं 
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सीनियर एडवोकेट रीटा कोहली ने कहा कि वह स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले से बेहद खुश और संतुष्ट हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि आरोपियों को मिसाली सजा मिलेगी। गौरतलब है कि एडवोकेट रीटा कोहली ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रुपी की जमानत रद्द करवाने के लिए मुफ्त में मुकदमा लड़ा था।

पीड़िता के दोस्त ने कहा कि इन तीन वर्ष में उसने कभी कोई त्योहार नहीं मनाया। खासकर फरवरी माह जब सभी युवा वेलेंटाइन के दिन सेलिब्रेट करते हैं तब वह सारी दुनिया से कटकर रहता है। बस हमेशा दिल और दिमाग में एक डर रहता है कि आरोपी अदालत से बचकर तो नहीं निकल जाएंगे। उसे बहुत लोग कहते कि आरोपी बच जाएंगे, उसका हौसला डगमगा जाता। सोमवार को भी अदालत आने से पहले उसे घबराहट हो रही थी लेकिन हौसला करके आ गया। अदालत के फैसले ने उसके हौसले को बुलंद किया है। भविष्य में दृढ़ता से लड़ाई जारी रहेगी।
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