मैनुअली जांच से भी अब परिजनों को ज्यादा उम्मीद नहीं
एनडीआरएफ की गाइडेंस में निगम मुलाजिम करेंगे जांच
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
सातवें दिन रविवार को सूफिया चौक में गिरी इमारत के मलबे का रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया, लेकिन मलबे में दबे तीन फायर कर्मियों के परिजनों का इंतजार अभी तक खत्म नहीं हुआ। अब उनका सुराग लगाने के लिए प्रशासन एनडीआरएफ की गाइडेंस से निगम के मुलाजिमों के दम पर मैनुअली जांच कराएगा, लेकिन इससे भी परिजनों को ज्यादा उम्मीद नहीं है।
काबिलेजिक्र है कि बीस नवंबर को सूफिया चौक में प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली इकाई में आग के बाद इमारत ध्वस्त हो गई। इस हादसे में तीन फायर अफसरों समेत 13 लोगों की मौत हो गई। जबकि दो को जिंदा बचा लिया गया। तीन फायर कर्मी सुखदेव, मनोहर लाल और मनप्रीत लापता रहे और अंत तक उनका पता नहीं चला और न ही उनके शव बरामद हुए।
रेस्क्यू आपरेशन खत्म करने का जब डीसी ने ऐलान किया तो फायरमैन सुखदेव के मौसेरे भाई इंद्रपाल ने कहा कि इकाई की बेसमेंट चैक नहीं कराई। इस पर डीसी ने जेसीबी मंगवा कर जमीन में कई वार कराए, पांच फुट तक गड्ढा कराया, लेकिन कोई बेसमेंट नहीं मिली। इस पर परिजनों की तसल्ली हुई।
उधर आपरेशन खत्म होते ही मोहल्ले के लोग जमा हो गए। लोगों का कहना है कि मलबे से बदबू आ रही है। इसलिए इसे पूरी तरह से यहां से हटाया जाए। उनका कहना है कि आसपास की दीवारों के साथ मलबा लगा है, उसे भी उतारना चाहिए।
मौके पर फायरकर्मी मनोहर लाल के परिजन नहीं पहुंचे। उनको फायर विभाग के अधिकारियों ने घर जाकर सूचना दी कि मनोहर लाल की मलबे से बॉडी नहीं मिली। इस पर परिजन निराश हो गए।
एनडीआरएफ के अधिकारी ने कहा कि इस आपरेशन में एनडीआरएफ के 145 लोग शामिल रहे। तीन टीमें बनाई गई थी और सौ से अधिक आधुनिक डिवाइस का उपयोग किया गया। मलबे में रुक रुककर अंत तक आग लगी रही। नतीजतन तपिश इतनी ज्यादा थी कि किसी का भी बचना संभव नहीं था। एसडीआरएफ के कर्मियों ने बताया कि तपिश में उनके बूट तक डैमेज हो गए।