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चचेरी बहन और चाची की हत्या करने वाले को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

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चाची और चचेरी बहन के हत्यारे को फांसी की सजा
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पांच साल की पैरवी के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने सुनाया अपना फैसला
बहन के साथ थे नाजायज संबंध, शादी का बना रहा था दबाव
पुलिस को उलझाने के लिए दीवार पर लिखा था ‘बाब’
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। मोहल्ला फतेहगंज इलाके में पांच साल पहले अपनी चचेरी बहन हिना (21) और चाची ऊषा ग्रोवर (55) को मौत के घाट उतारने के दोषी टिब्बा रोड के इकबाल नगर निवासी रिशु ग्रोवर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरुणवीर वशिष्ट की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद रिशु काफी घबरा गया। यह जानकारी जिला अटार्नी लुधियाना रविंदर कुमार अबरौल ने दी। शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई।
मोहल्ला फतेहगंज में हिना (21) और उसकी मां ऊषा रहते थे। हिना का भाई राहुल आस्ट्रेलिया में रहता था, जबकि बहन मोचपुरा बाजार में रहती थी। चचेरा भाई होने की वजह से रिशु का हिना के घर में आना जाना था। दोनों के संबंध भी थे। रिशु हिना को ब्लैकमेल कर रहा था। घर वालों को पता चला तो उन्होंने रिशु को चेतावनी दी। इसके बाद हिना की मंगनी कर दी गई। अगर घर में किसी तरह की जरूरत होती को ऊषा रिशु को बुला लेती थी। इसके बाद रिशु फिर से हिना को ब्लैकमेल करने लगा। वह हिना पर अपनी मंगनी तोड़ कर उसके साथ शादी करने के लिए दबाव बना रहा था। हिना ने अपने परिजनों को बताया जिन्होंने राहुल को बात बताई। राहुल ने आस्ट्रेलिया से रिशु को फोन कर चेतावनी दी। परिजन हिना की तैयारी में जुटे हुए थे। राहुल ने बहन की शादी के लिए चार लाख रुपये भेजे थे। इसके बारे में भी रिशु को पता था। रिशु शराब-सिगरेट पीने और जुआ खेलने का आदी था। जिस कारण उस पर काफी कर्ज भी था। पैसे आने के बाद रिशु ने हिना और ऊषा को मौत के घाट उतारने का प्लान बनाया। घटना को अंजाम देने के लिए वह 22 मई 2013 की रात को उनके घर रुक गया। देर रात उसने चाकू से हिना की हत्या की और फिर ऊषा को मौत के घाट उतारने के बाद रात करीब ढाई बजे वहां से फरार हो गया।
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जाते हुए रिशु ने हिना के खून से दीवार पर बाब लिख दिया ताकि सभी को लगे कि इस हत्याकांड को उनके घर प्लंबर का काम करने वाले बाबू ने अंजाम दिया है। बाबू की भी हिना के साथ किसी बात पर कहासुनी हुई थी। आरोपी घर से पैसे भी ले गया था। अगले दिन राहुल ने घर फोन किया तो किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद राहुल ने बहन और जीजा को फोन कर जानकारी दी। जब वह घर पहुंचे तो मां-बेटी की की लाशें खून से लथपथ पड़ी थी। सूचना मिलने पर थाना डिवीजन तीन में तैनात इंस्पेक्टर बृज मोहन पुलिस पार्टी के साथ मौके पर पहुंचे। घटना वाले दिन तो आरोपी खुद भी जोर-जोर से रोने का नाटक करता रहा।
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ऐसे पुलिस के हाथ चढ़ा
पुलिस ने राहुल से बात की। दो दिन बाद राहुल आस्ट्रेलिया से घर पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने पहले तो बाबू को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन बाबू से कुछ हासिल नहीं हुआ। पुलिस ने आस-पास के लोगों से पूछताछ की तो एक महिला ने बताया कि वह रोजाना रात ढाई बजे गुरुद्वारा साहिब माथा टेकने के लिए जाती है, उसने रिशु को घर से जाते हुए देखा था। वहीं मां-बेटी की हत्या के दौरान रिशु का खून घटनास्थल पर गिर गया था। दो तीन दिन बाद पुलिस ने रिशु को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। इंस्पेक्टर बृज मोहन की अगुवाई में पुलिस पार्टी ने आरोपी की निशानदेही पर गंदे नाले में गिराए चाकू, रुमाल और दस्ताने बरामद किए। आरोपी के कब्जे से दो लाख रुपये से ज्यादा नगदी भी बरामद की गई थी। इंस्पेक्टर बृज मोहन द्वारा इस मामले में पूरी पैरवी की गई और शुक्रवार को अदालत ने रिशु फांसी की सजा सुना दी।
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