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कांग्रेसी मंत्रियों तथा एमएलएज के घरों के बाहर परिवार सहित भूख हड़ताल करने का ऐलान

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अध्यापकों ने किया परिवार समेत भूख हड़ताल का एलान
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10 महीने से रेगुलर किए जाने के आदेश के इंतजार में बिना तनख्वाह कर रहे काम
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। दस महीने से रेगुलर होने के आदेश के इंतजार में बिना तनख्वाह के सरकारी स्कूलों में कार सेवा कर रहे उच्च योग्यता टीईटी पास 5178 अध्यापकों ने बैठक का आयोजन किया। इसमें उन्होंने अपनी जायज मांगों को लेकर कांग्रेसी मंत्रियों और एमएलए के घरों के आगे 23 सितंबर को परिवार समेत भूख हड़ताल करने का एलान किया।
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जिला प्रधान दीप राजा का कहना है कि प्रदेश सरकार सूबे के सरकारी स्कूलों में चार साल से 6000 रुपये प्रति महीने तनख्वाह पर सेवाएं निभा रहे 5178 अध्यापकों का शोषण कर रही है। यह उच्च योग्यता प्राप्त टीईटी पास अध्यापक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मास्टर काडर पद पर नवंबर 2014 और नवंबर 2015 में तीन साल की ठेका आधारित सेवा के तहत भर्ती किए गए थे। नियुक्ति पत्र की शर्तों के अनुसार 5178 अध्यापकों को तीन साल की ठेका आधारित सेवा पूरी करने के बाद नवंबर 2017 से पूरी तनख्वाह पर रेगुलर किया जाना था। मौजूदा सरकार द्वारा डीपीआई के जरिए 12 अक्तूबर 2017 को समूह जिला शिक्षा आफिसरों को पत्र जारी करके 5178 अध्यापकों को रेगुलर करने के लिए इनके केस मंगवाए गए थे। जोकि समूह जिला शिक्षा अफ्सरों के जरिए समय पर मुख्य आफिस मोहाली में पहुंचाए गए थे। लगभग एक साल का समय बीतने के बावजूद अध्यापकों के रेगुलर के हुकम जारी नहीं किए जा रहे हैं। यही नहीं अध्यापकों के रेगुलर होने के आर्डर तो क्या जारी करने थे बल्कि खजाना दफ्तरों के जरिए पत्र जारी करके 10 महीनों से इन अध्यापकों की तनख्वाह पर पक्की रोक लगा दी गई है। महंगाई के दौर में यह काबिल अध्यापक घरों का गुजारा करने के लिए तिल-तिल मर रहे हैं लेकिन सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रही। उन्होंने कहा कि मांगे न मानीं तो प्रदेश स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। इससे निकलने वाले नतीजों की जिम्मेदार सिर्फ पंजाब सरकार की होगी।
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