अध्यापकों के हक में उतरी भारतीय किसान यूनियन
अध्यापकों को सस्पेंड करने पर जताया विरोध, नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। प्रदेश सरकार की ओर से अध्यापकों के वेतन कम करने संबंधी दिए गए आदेश को तुगलकी फरमान बताते हुए भारतीय किसान यूनियन के नेता बलदेव सिंह और शिंगारा सिंह मान ने कहा कि ऐसा कर सरकार अध्यापकों के हकों पर डाका डाल रही है।
किसान नेताओं ने एलान किया कि किसान यूनियन अध्यापकों का समर्थन करती है और सांझा अध्यापक मोर्चा की तरफ से किए जा रहे संघर्ष के लिए किसान यूनियन हिमायत करती है। किसान नेताओं ने कहा कि शिक्षामंत्री ने अध्यापकों की मांगे मानने की बजाय पांच अध्यापकों को सस्पेंड कर अपना असली चेहरा दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब लोगों से शिक्षा का हक छीनकर प्राइवेट कंपनियों के हवाले करना चाहती है। इसके चलते बडे़ स्तर पर प्राइवेट घराने पंजाब में निवेश करने का प्लान कर रहे हैं। इसके अलावा पंजाबी यूनिवर्सिटी में संघर्ष कर रही छात्राओं पर हुए हमले पर भी किसान नेताओं ने विरोध जताया।
किसान नेताओं ने मांग की कि संघर्ष कर रही छात्राओं पर हमला करने वाले आरोपियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। जो पांच अध्यापक सस्पेंड किए गए हैं उनको बहाल कर अध्यापकों की मांगे मानी जाएं। किसान नेताओं ने कहा कि अध्यापकों के साथ हो रही धक्केशाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।