सांझा अध्यापक मोर्चा ने साथी जत्थेबंदियों के साथ लगाया धरना
धरना लगाने के बाद शहर में निकाला रोष मार्च, पंजाब सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे अध्यापकों ने रविवार को सांझा अध्यापक मोर्चा के बैनर तले साथी जत्थेबंदी किसान, मजदूर, ठेका कर्मी के अलावा अन्य यूनियनों के साथ मिलकर मिनी सचिवालय के पास धरना लगा दिया। इस धरने में पहुंचे करीब पांच सौ लोगों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
इस दौरान अध्यापक नेता हरजीत सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री ओपी सोनी ने अध्यापकों के साथ वायदा किया था कि जल्द ही उनकी मुख्यमंत्री के साथ बैठक करवा दी जाएगी, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी अध्यापकों की बैठक मुख्यमंत्री के साथ नहीं करवाई गई। इसके अलावा सरकार ने अध्यापकों से वायदा किया था कि उन्हें रेगुलर किया जाएगा, लेकिन अभी तक वह वायदा भी पूरा नहीं किया गया। किसान नेता शिंगारा सिंह मान ने कहा कि लोगों के साथ किए वायदे पूरे करने में कांग्रेस सरकार खजाना खाली होने का ढिंढोरा पीट रही है। दूसरी तरफ सरकार अपने विधायकों के वेतन में बढ़ोतरी कर आम जनता का पैसा वेतन के रूप में पानी की तरह बहा रही है। धरने के बाद सभी जत्थेबंदियों ने मिलकर पंजाब सरकार के खिलाफ शहर में रोष मार्च निकालकर नारेबाजी की। अध्यापक नेताओं ने कहा कि अगर सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को अध्यापकों के साथ बैठक कर उनकी जायज मांगें न मानी तो आने वाले दिनों में पंजाब स्तर पर संघर्ष छेड़ा जाएगा। इसका ऐलान मीटिंग करने के बाद किया जाएगा।
धरना लगाए जाने की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन ने धरनास्थल को पुलिस छावनी में तबदील कर दिया और मिनी सचिवालय के चारों गेटों पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया। इसके अलावा पुलिस ने सर्किट हाउस की तरफ जाने वाले रास्ते को पूरी तरह से सील कर दिया। धरना स्थल पर सौ से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे। धरने के बाद जैसे ही अध्यापकों ने अपनी साथी जत्थेबंदियों के साथ मिलकर शहर में रोष मार्च शुरू किया तो बठिंडा मानसा नेशनल हाईवे के दोनों तरफ जाम लग गया। हालांकि पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक पुलिस को भी धरनास्थल पर तैनात किया हुआ था, लेकिन रोष मार्च में एकदम हजूम आने से ट्रैफिक पुलिस भी उनके आगे बेबस नजर आई।