जेल में दो दिन में दो बंदियों की मौत
जेल प्रशासन ने कहा, मौत बीमारी से हुई मौत
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
केंद्रीय जेल बठिंडा में दो दिनों में दो कैदियों की मौत मौत हो गई। जेल प्रशासन का कहना है कि दोनों की मौत बीमारी से हुई है।
गांव बादल निवासी 85 वर्षीय हरदेव सिंह के खिलाफ अपनी बहू को कत्ल करने का केस चल रहा था। वह केंद्रीय जेल बठिंडा में बंद था। वह टीबी का मरीज था। उसे कुछ दिन पहले जेल अस्पताल में भर्ती किया गया था। गत दिन उसकी मौत हो गई।
इसी तरहसेना के हवलदार राजवंत यादव पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म किया है, जिस कारण उसका सेना में से कोर्टमार्शल किया गया। अदालत में केस चल रहा था। वह केंद्रीय जेल बठिंडा में बंद था और टीबी का मरीज था। उसको गत दिन सिविल अस्पताल बठिंडा में दाखिल करवाया गया, जहां मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई। बठिंडा जेल के सहायक सुपरिंटेंडेंट भूपिंदर सिंह ने बताया कि दोनों कैदी टीबी की बीमारी से पीड़ित थे, जिनका इलाज चल रहा था। दोनों की मौत बीमारी कारण हुई है।
जेलों में बंदियों की हालत जानवरों से भी बदतर: लक्खा सिधाना
पीपीपी के नेता रहे लखवीर सिंह लक्खा सिधाना का कहना है कि सूबे की जेलों में बंदियों की हालत जानवरों से भी बदतर है। जेल प्रशासन व पंजाब सरकार बंदियों की देखभाल के लिए सिर्फ खानापूर्ति करती है। जेलों में बड़ी संख्या में कैदी टीबी, काला पीलिया, एड्स से पीड़ित हं, जिनके इलाज कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। कैप्टन सरकार पंजाब को नशा मुक्त करने की बातें करती है और अभी तक जेलों को भी नशा मुक्ति नहीं कर सकी। जेलों में मुलाजिम ही नशा व्यापारी बनकर मोटी कमाई कर रहे है।