पंजाब में भाजपा अकेले दम पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मंगलवार को एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि पार्टी हाईकमान ने प्रदेश इकाई, पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्रदेश की जनता की राय लेते हुए यह फैसला किया है। जाखड़ ने कहा जिस कदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के लिए बीते वर्षों में कार्य किए हैं, उन कार्यों के आधार पर हम जनता के बीच उतरेंगे।
सुनील जाखड़ के बयान के बाद शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी अमृतसर में मंगलवार को पार्टी का रुख साफ कर दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा-हमारी पार्टी उच्च सिद्धांतों पर कायम है और पंथ एवं पंजाब की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हम पंजाब में गठबंधन न करके सभी सीटों पर अकेले ही चुनाव मैदान में उतरेंगे।
भाजपा के पंजाब प्रधान सुनील जाखड़ ने भाजपा-शिअद के बीच गठबंधन की सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब की सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी हाईकमान को प्रदेश इकाई ने प्रत्याशियों के कुछ नाम स्क्रीनिंग कर भेज दिए हैं, इन नामों पर हाईकमान जल्द मुहर लगाकर प्रत्याशियों की घोषणा करेगी।
पंजाब की बेहतरी के लिए लिया गया फैसला-जाखड़
प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि अकेले चुनाव लड़ने का फैसला पंजाब के भविष्य, जवानी-किसानी और व्यापारियों एवं पिछड़े वर्ग की बेहतरी के लिए लिया है। उन्होंने कहा कि बीते 10 साल में किसानों की फसल का एक-एक दाना उठाया गया है। करतारपुर कॉरिडोर की सदियों की मांग पीएम मोदी ने पूरी की।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पिछले कुछ महीनों से पंजाब में फिर से अकाली और भाजपा के बीच गठबंधन की चर्चा थी। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी इसके हक में थे। यहां तक कि देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कुछ दिनों पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि अकाली दल के साथ अभी कुछ तय नहीं हुआ है। बीजेपी ने आज तक अपने किसी भी साथी को जाने के लिए नहीं कहा। देश में आइडियोलॉजी के अनुसार सभी पार्टियां अपना पॉलिटिकल निर्णय करें, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। बीजेपी अपने एजेंडा, अपने प्रोग्राम और आइडियोलॉजी के अनुसार अपनी जगह स्थिर है।
सुखबीर का भाजपा पर पलटवार, कहा- शिअद पंजाब के लिए प्रतिबद्ध
लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी मंगलवार को अपना रुख साफ कर दिया। बादल ने ट्वीट कर कहा- हमारी पार्टी उच्च सिद्धांतों पर कायम है और पंथ और पंजाब की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मंगलवार सुबह सुनील जाखड़ ने कहा था कि भाजपा पंजाब में सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
इस पर अमृतसर में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) कुछ राष्ट्रीय पार्टियों के विपरीत, केवल संख्या बल के खेल से प्रेरित राजनीतिक पार्टी नहीं है। उन्होंने कहा कि अकाली दल पंजाब में सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। शिअद ने हमेशा पंथ और पंजाब के मुद्दों को राजनीति से ऊपर रखा है। पार्टी को सत्ता का कोई लालच नहीं है। बाद में, सुखबीर ने ट्वीट किया- 'हम एक स्पष्ट दृष्टिकोण वाला 103 साल पुराना आंदोलन हैं और हम हमेशा सिद्धांतों के लिए खड़े रहे हैं। यही हमारा लक्ष्य बना रहेगा। शिअद की कोर कमेटी ने पहले ही हमारी स्थिति और प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं।
किसान आंदोलन के कारण अकाली दल हुआ था अलग
2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए किसान आंदोलन के बीच अकाली दल ने भाजपा से अपना वर्षों पुराना गठबंधन तोड़ लिया था। केंद्र में अकाली दल व भाजपा में गठजोड़ के कारण किसानों का गुस्सा स्थानीय नेताओं पर निकल रहा था। किसानों ने भाजपा नेताओं के साथ-साथ अकाली दल का बायकॉट भी करना शुरू कर दिया था। 18 सितंबर 2020 को बादल परिवार की बहू हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अकाली दल ने भाजपा से अलग होने की घोषणा कर दी थी।
मोगा डेक्लरेशन के बाद दोनों दल आए थे साथ
एनडीए के विस्तार में अकाली दल पहला संगठन था, जिसने भाजपा के साथ हाथ मिलाया था। 1992 तक बीजेपी और अकाली दल अलग-अलग चुनाव लड़ते थे। चुनावों के बाद अकाली दल बीजेपी को समर्थन देती थी। 1996 में अकाली दल ने 'मोगा डेक्लरेशन'' पर साइन किया था और 1997 में पहली बार एक साथ चुनाव लड़ा था। मोगा डेक्लरेशन में भाजपा के साथ तीन अहम मुद्दों पर बात हुई थी। पहला पंजाबी आइडेंटिटी, दूसरा आपसी सौहार्द और तीसरा राष्ट्रीय सुरक्षा कर मुद्दा इसमें शामिल था। 1984 के दंगों के बाद देश में पैदा हुए माहौल के कारण दोनों पार्टियां साथ आई थीं।