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टोक्यो ओलंपिक: दिग्गज खिलाड़ियों की सलाह- हॉकी में स्वर्ण पदक चाहिए तो शक्तिशाली टीमों के साथ खेलें मैच

Wed, 11 Aug 2021 05:03 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

हॉकी खिलाड़ी गगनअजीत सिंह ने कहा कि पुरुषों की टीम में बहुत अच्छा तालमेल है। उनको अगले ओलंपिक तक सुविधाओं की कमी नहीं आनी चाहिए। जो खिलाड़ी वर्तमान में हैं, उनकी पीठ थपथपानी चाहिए। अब एक क्रांति की शुरुआत है और सरकारों को चाहिए कि वह इस क्रांति का हिस्सा बने और हॉकी का प्रमोशन गांव से लेकर शहर तक करें।
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भारतीय हॉकी टीम - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम के ओलंपिक खेलों में प्रदर्शन संतुष्टिजनक है लेकिन अगर मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ टीमों में बेहतरीन फारवर्ड होते तो स्वर्ण पदक मुट्ठी में होता। हालांकि पुराने खिलाड़ियों का कहना है कि दोनों टीमों में वर्तमान खिलाड़ियों का तालमेल बेहतरीन है, इसलिए इनके विश्व की छह शक्तिशाली टीमों के साथ निरंतर मैच करवाने चाहिए ताकि अगले ओलंपिक तक दोनों टीम सोने का तगमा भारत के लिए लेकर आएं।

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भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान राजबीर कौर का कहना है कि महिला हॉकी खिलाड़ियों के लिए पंजाब सरकार की तरफ से कोई नौकरी नहीं है। भारत की टीम में खेलने वाली एकमात्र महिला हॉकी खिलाड़ी गुरजीत कौर इलाहाबाद में नौकरी कर रही हैं सिर्फ रेलवे ही महिला हॉकी खिलाड़ियों को नौकरी देती है। यही वजह है कि लड़कियों का रुझान हॉकी की तरफ काफी कम है। 



पंजाब सरकार को अपनी खेल नीति सुधारनी होगी। पंजाब का दोआबा हॉकी का मुख्य केंद्र है, यहां पर सरकार को मैदान तैयार कर कोचिंग देनी चाहिए। वह कहती हैं कि अगर पुरुष टीम में फारवर्ड होते तो प्रदर्शन इससे भी अच्छा होता। हॉकी टीम में लंबे समय से खेल रहे आकाशदीप व रमनदीप सिंह के अलावा एसवी सुनील को ओलंपिक में स्थान न देना भी एक अच्छा फैसला नहीं था। तीनों खिलाड़ी तजुर्बेकार थे और 10 साल से भारतीय टीम का हिस्सा थे।

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हॉकी खिलाड़ी लखविंदरपाल सिंह खैरा का कहना है कि मौजूदा दोनों टीम परफेक्ट हैं, दोनों टीमों में लय है और उत्साह है। सेमीफाइनल और फाइनल मैच में शक्तिशाली टीम पहुंचती है। विश्व में हॉकी में हॉलैंड, इंग्लैंड, जर्मन, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया व पाकिस्तान की टीम काफी नामवर हैं। ऐसी टीमों के साथ भारतीय टीमों के लगातार मैच चलते रहने चाहिए। इससे टीमों में उत्साह और चोटी की टक्कर होती रहेगी और खेल में सुधार होगा। 

अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी गगनअजीत सिंह का कहना है कि मैदान में पहलवान भिड़ते हैं तो जीत एक की होती है। लड़कियों की टीम आठवें स्थान से सीधा चौथे स्थान पर आ गई है। उनको उत्साहित करने की जरूरत है। अगर यह उत्साह अगले दो साल चलता है तो अगला ओलंपिक भारत के नाम होगा। 

वहीं पुरुषों की टीम में बहुत अच्छा तालमेल है। उनको अगले ओलंपिक तक सुविधाओं की कमी नहीं आनी चाहिए। जो खिलाड़ी वर्तमान में हैं, उनकी पीठ थपथपानी चाहिए। अब एक क्रांति की शुरुआत है और सरकारों को चाहिए कि वह इस क्रांति का हिस्सा बने और हॉकी का प्रमोशन गांव से लेकर शहर तक करें।
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