प्रकाश सिंह बादल की सरपरस्ती और सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई वाले शिरोमणि अकाली दल को अस्तित्व बचाने के लिए दोबारा पंथक वोटों से ही आशा की किरण नजर आ रही है। यही वजह है कि सुखबीर बादल सारा फोकस पंथक वोटों पर कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पंथक सलाहकार बोर्ड का गठन किया है और जिसने रणनीति बनानी शुरू कर दी है कि पंजाब में पंथक वोट को कैसे अकाली दल की झोली में डलवाना है।
इन पंथक नेताओं ने शिअद को कहा अलविदा...
बेअदबी की घटनाओं के बाद पंथक वोटर नाराज..
शिअद (बादल) के कार्यकाल में बेअदबी की घटनाओं, गुरमीत राम रहीम को श्री अकाल तख्त साहब से माफी, बरगाड़ी में सिख संगत पर गोलियां चलाने की घटनाओं ने पंथक वोटरों में अकाली दल (बादल) के प्रति गहरी नाराजगी पैदा कर दी। उसका नतीजा रहा कि पंथक वोट अकाली दल से खिसकता जा रहा है। 2019 में अकाली दल लोकसभा चुनाव में दो सीटों पर सिमट गया। 2022 के विस चुनावों में अकाली दल को सिर्फ तीन सीटें हैं, जिसमें एक बसपा के उम्मीदवार की है। यही वजह रही कि 2022 के चुनाव में प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया चुनाव हार गए।
बादल परिवार हमेशा सिख कौम का नुकसान करता आया है
बादल परिवार ने हमेशा पंथ का इस्तेमाल कर सत्ता हासिल की है और बाद में पंथ का नुकसान किया है। उनकी पार्टी हाशिए पर है तो वे वोट की राजनीति के लिए इनसे नजदीकियां बढ़ाने में लगे हैं। यह लोगों की भावनाओं से खुला खिलवाड़ है। आज वे बंदी सिखों की रिहाई के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी कर रहे हैं लेकिन तब क्या किया जब केंद्र की भाजपा सरकार के साथ थे। -राजविंदर कौर थियाड़ा, प्रदेश सचिव, आप