पंजाब मंत्रिमंडल द्वारा बासमती चावल उद्योग को प्रोत्साहित करने के नाम पर घोषित की गई ताजा छूट का लाभ केवल इन्वेस्ट पंजाब अभियान के अंतर्गत स्थापित चंद मेगा यूनिटों को ही होगा। यह बात प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने संवाददाता सम्मेलन में कही।
जाखड़ ने कहा कि जल संसाधन बचाने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति में सैकड़ों छोटे बासमती चावल उद्योग बहुमूल्य सहयोग देते रहे हैं। इनके फसल विविधीकरण प्रयासों की सराहना करते हुए सरकार ने बासमती वैरायटी पर बीते कुछ वर्षों में मार्केट फीस से छूट दी थी, लेकिन इसे सितंबर 2015 में वापस लेकर छोटे उद्योगों को संकट में धकेल दिया गया। सरकार के नवीनतम फैसले से सैकड़ों छोटे बासमती यूनिट बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे।
जाखड़ ने कहा कि अब मेगा यूनिटों को मार्केट फीस, ग्रामीण विकास शुल्क और पीआईडीएफ में जो छूट दी गई है वह सरकार की मूल नीति में शामिल नहीं थी। नई छूट घोषित करने से पूर्व सरकार बिजली कर, स्टांप शुल्क, ब्याज मुक्त कर्जे वैट कर मामले में सुविधाओं की घोषणा कर चुकी थी।
ये सुविधाएं बासमती वैरायटी की कुल लागत का 6 प्रतिशत के करीब हैं। अब मेगा यूनिटों को नई छूट घोषित करने से छोटे उद्योगों को कुल करों के भुगतान में 12 प्रतिशत ज्यादा का भुगतान करने की स्थिति में वह मेगा यूनिटों के साथ मुकाबला नहीं कर सकेंगे जिससे छोटे उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच जाएंगे।