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रूस व यूक्रेन की जंग से सहमे पंजाब के उद्यमी, कारोबारियों ने फ्लाइट कैंसिल की

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जालंधर। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के कारण पंजाब के निर्यातक सहम गए हैं। यूक्रेन और रूस भेजे जाने वाले शिपमेंट अब भारत में ही फंस गए हैं, जिससे उन्हें काफी नुकसान होने का अंदेशा है। पंजाब के कारोबारी रूस और यूक्रेन को प्लास्टिक, रबर, वस्त्र, होजरी, उर्वरक, कृषि उपकरण, मचान और हाथ के औजारों का निर्यात करते हैं। खासकर स्पोर्ट्स इंडस्ट्री व लेदर कारोबार काफी जबरदस्त प्रभावित हुआ है।
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जालंधर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को जबरदस्त असर हुआ है। जालंधर से रत्न ब्रर्दर्स के मालिक प्रसिद्ध निर्यातक तिलक खिंदर का कहना है कि उन्होंने अपने टूर को कैंसिल कर दिया है। उन्होंने नार्वे के लिए जाना था लेकिन रूस व यूक्रेन की जंग से उनका कारोबार प्रभावित हुआ है, इसका असर जालंधर की तमाम स्पोर्ट्स इंडस्ट्री पर हुआ है। जालंधर यूरोपियन देशों में खेल का सामान निर्यात करता है और यूक्रेन में भी काफी स्पोर्ट्स गुड्स जाते हैं लेकिन अब कारोबार ठहर गया है, एक स्थान पर स्थिर हो गया है। हमारी इंडस्ट्री पूरे हालात पर नजर रखे हुए हैं।
हैंड टूल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह का कहना है कि संघर्ष का न केवल इन दोनों देशों में बल्कि अन्य देशों में भी हाथ के औजारों के निर्यात पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। करीब 25 फीसदी निर्यात गिर गया है। व्यापार पर प्रभाव की मात्रा युद्ध की अवधि पर निर्भर करेगी, जो माल की आवाजाही और भुगतान दोनों को प्रभावित करेगी। वर्तमान संकट देश के निर्यात को प्रभावित कर रहा है क्योंकि पश्चिम देश रूस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। वित्त वर्ष 2022 के पहले नौ महीनों में 2.5 बिलियन डॉलर के निर्यात और 6.9 बिलियन डॉलर के आयात के साथ रूस भारत का 25 वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। जबकि इस वित्त वर्ष में अब तक यूक्रेन के साथ द्विपक्षीय व्यापार 2.3 अरब डॉलर का है, इसमें हैंड टूल का निर्यात प्रमुख है।
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निर्यातकों को यह भी डर है कि अगर रूस पर व्यापक प्रतिबंधों की घोषणा की जाती है तो यह निर्यात प्रभावित हो सकता है। युद्ध के कारण निर्यातकों को माल के भुगतान में देरी का सामना करना पड़ सकता है। जिन लोगों ने लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किया है, उन्हें देरी के कारण नुकसान हो सकता है। खेल उद्योग संघ के रविंदर धीर यह चिंता जाहिर करते हुए कहते हैं अगर युद्ध की अवधि लंबी चली जाती है तो इसका असर जबरदस्त पंजाब के निर्यातकों पर होगा।
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