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ड्रग मनी से रियल एस्टेट का कारोबार, रिटायर डीजीपी से लेकर मंत्री संतरी तक का करोड़ों रुपया जीता मौड़ के पास

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जालंधर। ड्रग मनी के करोड़ों रुपये प्रापर्टी के कारोबार में निवेश कर काले धंधे को सफेद चादर पहनाने वाले कबड्डी खिलाड़ी जीता मौड के पास रिटायर डीजीपी से लेकर मंत्री संतरी तक नेे निवेश कर रखा था। इतना ही नहीं लाल बत्ती वाली गाड़ियां अकसर उसके कार्यालय में आती जाती दिखाई देती थी। लिहाजा, एसटीएफ की टीम ने जीता मौड के लैपटॉप को खंगालना शुरू कर दिया है और काफी प्रापर्टी व निवेश के अलावा पैसे के लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं।
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जीता मौड यूके का सिटीजन हैं लेकिन पंजाब में उसने तेजी से अपना कारोबार फैला रखा था। जांच टीम के आला अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, रंजीत सिंह जीता मौड ने कुछ ही वर्षों में बटाला से लेकर मोहाली तक रियल इस्टेट कारोबार में अपना सिक्का जमा लिया था।
प्रापर्टी कारोबार व धक्केशाही में उसका सिक्का इसलिए चलने लगा क्योंकि कई खाकी वर्दी वाले उसके दीवाने हो गए थे। दो रिटायर डीजीपी ने तो करोड़ों रुपये जीता मौड के पास निवेश कर रखे थे। इसके अलावा पंजाब के दो पावरफुल मंत्रियों ने भी जीता मौड के सिर पर हाथ रखा हुआ था। यही कारण था कि उसकी जायज नाजायज कालोनियों की तरफ सरकारी अधिकारी आंख उठाकर नहीं देख सकते थे। वहीं उसके पास कई पंजाब के स्थानीय पीपीएस अधिकारियों ने भी निवेश कर रखा था, जिसका हिसाब-किताब वह लगातार लेते थे।
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डीजीपी एसटीएफ हरप्रीत सिंह सिद्धू ने इस पूरे मामले में लुधियाना के एसटीएफ के इंचार्ज स्नेहदीप को मुख्य जांच अधिकारी नियुक्त कर रखा है। सूत्रों की मानें तो कई पुलिस अधिकारियों ने जीता मौड के साथ मिलकर चांदी कूटी है। इसी वजह से जीता के साथ दो पुलिस इंस्पेक्टर तैनात थे, जिनमें जगदीश सिंह व मुनीष शामिल थे। मुनीष ने ही जीता का सारा लेखा-जोखा संभाल रखा था। कहां पर कब क्या पहुंचाना है ? कब लेकर आना है सब वर्दीधारियों की मिलीभगत से गोरखधंधा चल रहा था। इसी कारण प्रापर्टी कारोबार में जब जीता मौड धक्केशाही करता था तो उसके खिलाफ उठने वाली आवाज को दबा दिया जाता था। काले रंग के सफारी सूट में जीता ने अलग से निजी सिक्योरिटी अपने साथ रखी थी, जो पूरी गाड़ी भरकर उसकी कार के पीछे चलती थी। हालात यह है कि रंजीत सिंह जीता मौड ने अपने काले धंधे को बखूबी अंजाम देने के लिए अपने पास हाल ही में पंजाब पुलिस के तेज तर्रार रिटायर एसीपी राष्ट्रपति मेडल से नवाजे जा चुके विमलकांत को तैनात कर रखा था। विमलकांत रिटायर होने के बाद जीता के कार्यालय को संभालता था।
एसटीएफ की टीम ने मुनीष के लैपटॉप को खंगालना शुरू कर दिया है और प्याज की परत की तरह कई चौंकाने वाली बातें सामने आने लगी हैं। फगवाड़ा के रहने वाले सिमरनजीत सिंह पर भी एसटीएफ का घेरा बढ़ता जा रहा है। सिमरनजीत सिंह जीता मौड की सारी कंपनियों का राजदार है।
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