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चार माह से आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को खाना नहीं

Thu, 28 Nov 2013 11:11 PM IST
अमर उजाला, जालंधर
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एक तरफ पंजाब सरकार सूबे में गरीब लोगों को एक रूप किलो गेहूं व सस्ती दरों पर दालें देने का वादा कर हमदर्द होने की मिसाल दे रही है वहीं दूसरी तरफ 26 हजार 656 आंगनबाड़ी केंद्रों में जाने वाले लाखों बच्चे करीब चार माह से भूखे हैं।
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आंगनबाड़ी केंद्रों में खाना न पहुंचने के कारण गर्भवती महिलाओं व खून की कमी वाली किशोरियों को भी पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। सोशल सिक्योरिटी वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट स्कीम के डायरेक्टर के मुताबिक अभी भी 15 दिन बच्चों को खाने के लिए प्रतीक्षा करनी होगी।

आंगनबाड़ी से जुड़े कर्मचारियों के मुताबिक बच्चों के भूखे रहने के पीछे सरकार का खाली खजाना जिम्मेवार है। इस स्कीम के तहत बच्चों व महिलाओं को पौष्टिक आहार देने के लिए 50 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार देती है तो 50 फीसदी हिस्सा पंजाब सरकार को देना पड़ता है। केंद्र की हिस्सा तभी मिलता है जब पंजाब सरकार अपना हिस्सा शो करती है। अभी मौजूदा समय के दौरान अपनी हिस्सेदारी अदा करने के लिए पंजाब सरकार के पास पैसा नहीं है।
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इस कारण बच्चों को गत चार माह से पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। पंजाब सरकार के खाली खजाने के कारण जहां बच्चों को दोपहर का खाना नहीं मिल पा रहा है वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी धज्जियां उड़ रही हैं। कोर्ट ने आदेश दे रखा है कि बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आंगनबाड़ी में जाने वाले बच्चों को साल के 365 दिन में कम से कम 300 दिन खाना जरूर मिले।

बच्चों के लिए गंभीर नहीं सरकार : ऊषा रानी
आंगनबाड़ी यूनियन की प्रदेश प्रधान ऊषा रानी ने पंजाब सरकार पर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में पौष्टिक आहार लेने वालों की गिनती कम से कम 50 है। इसमें गर्भवती महिलाओं, किशोरियां तथा बच्चे शामिल हैं। बच्चों के खाने को लेकर 11 अक्टूबर को हुई बैठक में डायरेक्टर को जानकारी दी गई थी। उन्होंने 15 दिन में खाना मुहैया करवाने की बात कही थी। अब तक सेंटरों में खाना नहीं पहुंच सका है।

यह खाना मिलता है बच्चों को
आंगनबाड़ी सेंटरों में आने वाले बच्चों को पौष्टिक आहार के रूप में दलिया, दो दिन पंजीरी, दो दिन दूध वाला दलिया तथा दो दिन खीर दी जाती है। इसके अतिरिक्त मार्कफेड की तरफ से तैयार की गई देसी घी वाली पंजीरी भी देनी जरूरी है।

डीडीओ पावर बनी देरी का कारण : डायरेक्टर
सोशल सिक्योरिटी वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट के डायरेक्टर गुरकिरत कृपाल सिंह का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में जाने वाले बच्चों के खाने में डीडीओ पावर देरी का कारण बनी है। प्रत्येक वर्ष ग्रांट रिलीज करने के लिए अकाउंटेंट जनरल आफिस की तरफ से डीडीओ पावर रिन्यू की जाती हैं। इस बार पावर देने में देरी हुई है। अभी डीडीओ पावर तो दे दी गई हैं। यही नहीं खर्च को ऑनलाइन करने की विधि ने भी इस स्कीम पर असर डाला है। अभी भी बच्चों को खाना मिलने के लिए 15 दिन इंतजार करना होगा। राज्य सरकार की तरफ से हिस्सेदारी न अदा करना गलत है। इस स्कीम पर करीब साल में दो सौ करोड़ रुपये का खर्च निर्धारित किया जाता है। इस बार भी करीब 125 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें 50 फीसदी हिस्सेदारी पंजाब सरकार ने अदा करनी है।
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