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Punjab: सम्मान समारोह में दो पैरालंपिक खिलाड़ियों को भूली पंजाब सरकार, आहत खिलाड़ी बोले-ये बेरुखी सही नहीं

Mon, 29 Aug 2022 02:00 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

जालंधर को किसी समय किक्रेट का मक्का कहा जाता था, लेकिन इस समय हालात ये हैं कि पंजाब के साथ साथ जालंधर से भी खेल, खिलाड़ी व खेल उद्योग खत्म होता जा रहा है। जालंधर से नए खिलाड़ी मिल नहीं पा रहे हैं, जिसका मुख्य कारण जालंधर में खेल ढांचा न होना माना जा रहा है।
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कॉमनवेल्थ विजेताओं के साथ सीएम भगवंत मान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब सरकार ने 27 अगस्त को कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया, जिसमें हॉकी, क्रिकेट, वेटलिफ्टिंग और अन्य खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को बुलाकर सम्मान दिया गया। इसमें जालंधर से भाग लेने वाले दो पैरालंपिक पावर लिफ्टिंग खिलाड़ी नजरअंदाज कर दिए गए। जालंधर के पैरालंपिक खिलाड़ी परमजीत कुमार (वासी फिल्लौर) और मनप्रीत कौर वासी चक्क ढड्डां दोनों पावर लिफ्टर और कोच राजिंदर कुमार को इस बात का मलाल है। 

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उन्होंने कहा कि जब 2018 में पॉलिसी बनी कि इंटरनेशनल गेम्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को समान रूप से देखते हुए सम्मान मिलेगा तो फिर भेदभाव क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार खेल मेला करवा रही है कि नए खिलाड़ी आएंगे, लेकिन जो हैं उनकी कद्र नहीं है, ऐसी बेरुखी के कारण ही खिलाड़ी खेल मैदानों से दूर हो रहे हैं और सरकार के कारनामों के बारे में जानेंगे तो खेलना ही छोड़ देंगे। 

भावुक परमजीत और मनप्रीत कौर ने कहा कि सरकार ने हमें सम्मान समारोह में निमंत्रण के योग्य भी नहीं समझा, जबकि हमने भी कॉमनवेल्थ गेम्स में पंजाब की तरफ से भाग लिया तो हमें क्यों भुला दिया गया? हमें परसों कोच राजिंदर सिंह का फोन आया कि सरकार कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का सम्मान समारोह कर रही है, एक दिन पहले पता चला तो किसी से संपर्क ही नहीं कर सके। जबकि हम भी उस पल का हिस्सा थे। जो सम्मान बाकी खिलाड़ियों को मिला, हम भी उसके हकदार हैं। सरकार खेल को प्रमोट करने की बात करती है और खिलाड़ियों का मनोबल डाउन कर रही है तो नए खिलाड़ी कहां से निकलेंगे। हर कोई सम्मान, इनाम और नौकरी के लिए खेलता है, हमें न तो सम्मान मिला, न इनाम और न ही नौकरी, क्या पदक जीतना ही सबकुछ है। इंटरनेशनल लेवल पर खेलकर देश और प्रदेश का नाम रोशनकरना कोई मायने नहीं रखता। मनप्रीत कौर ने बताया कि वह पैरा पावर लिफ्टर है और कॉमनवेल्थ में 4 स्थान पर रही थी, वह पहली बार मैदान पर उतरी थी, कोशिश पूरी की मेडल जीतने की, लेकिन नहीं जीती तो सरकार ने भी साथ छोड़ दिया।

जब लौटे तो पीएम ने बांहें खोलकर किया था स्वागत 

पंजाब सरकार ने जिस तरह से हमें नजरअंदाज किया, उसे बयां नहीं कर सकते, यह कहते हुए पैरालंपिक खिलाड़ी मनप्रीत कौर और परमजीत कौर की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि जब हम कॉमनवेल्थ में खेलकर लंदन से लौटे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बांहें खोलकर उनका स्वागत किया, लेकिन पंजाब पहुंचने पर कोई मिलने तक नहीं आया। खेल को प्रमोट करने से पहले खिलाड़ियों की क्या मदद करेंगे, उसका खाका तैयार करें, नहीं तो आने वाले समय में मैदान खाली ही नजर आएंगे।

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राजनीति की भेंट चढ़ गया जालंधर का अंतरराष्ट्रीय किक्रेट स्टेडियम

जालंधर को किसी समय किक्रेट का मक्का कहा जाता था, लेकिन इस समय हालात ये हैं कि पंजाब के साथ साथ जालंधर से भी खेल, खिलाड़ी व खेल उद्योग खत्म होता जा रहा है। जालंधर से नए खिलाड़ी मिल नहीं पा रहे हैं, जिसका मुख्य कारण जालंधर में खेल ढांचा न होना माना जा रहा है। जालंधर से क्रिकेट में हरभजन सिंह, राहुल शर्मा, मनदीप सिंह, रजिंदर सिंह घई, विक्रम राठौड़ जैसे खिलाड़ी निकल चुके हैं, लेकिन इस समय इन्फ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण कई खिलाड़ी आगे बढ़ नहीं पा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस स्टेडियम के लिए 25 करोड़ का फंड अलग रखा गया है व जल्द ही इस स्टेडियम का निर्माण शुरू करवाया जा सकता है।

इंटरनेशनल स्तर का स्टेडियम बन गया जिला स्तरीय

जालंधर के बर्ल्टन पार्क में किसी समय इंटरनेशनल लेबल का क्रिकेट स्टेडियम हुआ करता था। इस स्टेडियम में इंटरनेशनल स्तर के किक्रेट मैच हुआ करते थे। इस स्टेडियम में कपिल देव, सुनील गवास्कर, रवि शास्त्री व अन्य कई चोटी के खिलाड़ी खेल चुके हैं। नेहरू कप का इंटरनेशनल मैच इस स्टेडियम में हो चुका है, लेकिन 2010 में यह स्टेडियम राजनीति की बलि चढ़ चुका है। इस स्टेडियम को इंटरनेशनल स्तर का बनाने के लिए तोड़ तो दिया गया, लेकिन स्टेडियम के लिए कुछ इस तरह की राजनीति हुई कि यह स्टेडियम अभी तक बन ही नहीं सका है। अगर यह स्टेडियम आज से 10 साल पहले बन चुका होता तो जालंधर के कई खिलाड़ी आईपीएल व इंटरनेशनल खेल चुके होते।

शहर की 12 एकेडमियों में प्रैक्टिस कर रहे हैं भविष्य के किक्रेटर जालंधर के बर्ल्टन पार्क में बने किक्रेट स्टेडियम में अब मात्र जिला स्तर के मैच ही हो रहे हैं। किक्रेट में अपना भविष्य तलाश रहे बच्चे अब निजी एकेडमी में जाकर प्रैक्टिस कर रहे हैं। जालंधर में पहले किक्रेटर हरभजन सिंह किक्रेट अकादमी चलाते थे, लेकिन किसी कारणवश उन्होंने एकेडमी बंद कर दी है। इसके अलावा पीसीए के साथ जालंधर की 12 एकेडमी रिजिस्ट्र है, जिसमें बच्चे प्रैक्टिस कर अपने सपने सच्चे करने की कोशिश कर रहे हैं। 

किक्रेट स्टेडियम बनाने के लिए आ चुका है प्रशासन के पास फंड

बर्ल्टन पार्क स्टेडियम के अभी तक न बन पाने के बारे में पीसीए के ज्वाइंट सचिव सुरजीत राय बिट्टा का कहना है कि इस किक्रेट स्टेडियम को बनाने के लिए फंड आ चुका है। हम तो चाहते हैं कि जिस शहर में हरभजन सिंह जैसा खिलाड़ी हो, उस शहर में क्रिकेट स्टेडियम जरूर बनना चाहिए। इस स्टेडियम को बनाने में देरी क्यों हो रही है, ये तो जिला प्रशासन ही बता सकता है। पीसीए अपने बजट से किक्रेट एकेडमियों के साथ मिलकर ग्राउंड व अन्य खर्च कर नए खिलाड़ी पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्टेडियम का निर्माण हो जाएगा।
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