राजनीति की भेंट चढ़ गया जालंधर का अंतरराष्ट्रीय किक्रेट स्टेडियम
जालंधर को किसी समय किक्रेट का मक्का कहा जाता था, लेकिन इस समय हालात ये हैं कि पंजाब के साथ साथ जालंधर से भी खेल, खिलाड़ी व खेल उद्योग खत्म होता जा रहा है। जालंधर से नए खिलाड़ी मिल नहीं पा रहे हैं, जिसका मुख्य कारण जालंधर में खेल ढांचा न होना माना जा रहा है। जालंधर से क्रिकेट में हरभजन सिंह, राहुल शर्मा, मनदीप सिंह, रजिंदर सिंह घई, विक्रम राठौड़ जैसे खिलाड़ी निकल चुके हैं, लेकिन इस समय इन्फ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण कई खिलाड़ी आगे बढ़ नहीं पा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस स्टेडियम के लिए 25 करोड़ का फंड अलग रखा गया है व जल्द ही इस स्टेडियम का निर्माण शुरू करवाया जा सकता है।
इंटरनेशनल स्तर का स्टेडियम बन गया जिला स्तरीय
जालंधर के बर्ल्टन पार्क में किसी समय इंटरनेशनल लेबल का क्रिकेट स्टेडियम हुआ करता था। इस स्टेडियम में इंटरनेशनल स्तर के किक्रेट मैच हुआ करते थे। इस स्टेडियम में कपिल देव, सुनील गवास्कर, रवि शास्त्री व अन्य कई चोटी के खिलाड़ी खेल चुके हैं। नेहरू कप का इंटरनेशनल मैच इस स्टेडियम में हो चुका है, लेकिन 2010 में यह स्टेडियम राजनीति की बलि चढ़ चुका है। इस स्टेडियम को इंटरनेशनल स्तर का बनाने के लिए तोड़ तो दिया गया, लेकिन स्टेडियम के लिए कुछ इस तरह की राजनीति हुई कि यह स्टेडियम अभी तक बन ही नहीं सका है। अगर यह स्टेडियम आज से 10 साल पहले बन चुका होता तो जालंधर के कई खिलाड़ी आईपीएल व इंटरनेशनल खेल चुके होते।
शहर की 12 एकेडमियों में प्रैक्टिस कर रहे हैं भविष्य के किक्रेटर जालंधर के बर्ल्टन पार्क में बने किक्रेट स्टेडियम में अब मात्र जिला स्तर के मैच ही हो रहे हैं। किक्रेट में अपना भविष्य तलाश रहे बच्चे अब निजी एकेडमी में जाकर प्रैक्टिस कर रहे हैं। जालंधर में पहले किक्रेटर हरभजन सिंह किक्रेट अकादमी चलाते थे, लेकिन किसी कारणवश उन्होंने एकेडमी बंद कर दी है। इसके अलावा पीसीए के साथ जालंधर की 12 एकेडमी रिजिस्ट्र है, जिसमें बच्चे प्रैक्टिस कर अपने सपने सच्चे करने की कोशिश कर रहे हैं।
किक्रेट स्टेडियम बनाने के लिए आ चुका है प्रशासन के पास फंड
बर्ल्टन पार्क स्टेडियम के अभी तक न बन पाने के बारे में पीसीए के ज्वाइंट सचिव सुरजीत राय बिट्टा का कहना है कि इस किक्रेट स्टेडियम को बनाने के लिए फंड आ चुका है। हम तो चाहते हैं कि जिस शहर में हरभजन सिंह जैसा खिलाड़ी हो, उस शहर में क्रिकेट स्टेडियम जरूर बनना चाहिए। इस स्टेडियम को बनाने में देरी क्यों हो रही है, ये तो जिला प्रशासन ही बता सकता है। पीसीए अपने बजट से किक्रेट एकेडमियों के साथ मिलकर ग्राउंड व अन्य खर्च कर नए खिलाड़ी पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्टेडियम का निर्माण हो जाएगा।