सूबे में धान की कटाई पूरी हो चुकी है। 20 नवंबर से गेहूं की बिजाई शुरू होगी। इस बार करीब 35 लाख हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बिजाई होने की संभावना है। हालांकि मालगाड़ियों के परिचालन पर केंद्र की रोक के कारण अभी तक यूरिया खाद का पर्याप्त स्टाक नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में गेहूं की बिजाई पर असर पड़ सकता है। कृषि कानूनों के विरोध में सूबे में धरने पर बैठे किसानों ने मालगाड़ियों के लिए ट्रैक से धरना हटा दिया था, लेकिन केंद्र ने मालगाड़ियों के आवागमन पर रोक लगा दी।
मालगाड़ियों पर रोक के कारण इस बार यूरिया खाद सहित अन्य सप्लीमेंट खादों की सप्लाई प्रभावित होने की संभावना है। पिछल कई सालों में इन दिनों जरूरत के हिसाब से 50 प्रतिशत यूरिया पहुंच जाता था। किसानों के अनुसार, गेहूं की बिजाई के करीब 20 दिन बाद यूरिया की जरूरत पड़ती है। अगर समय पर यूरिया फसल में न डाला जाए तो फसल का रंग पीला पड़ने लगता है और पैदावार प्रभावित होती है।
पंजाब के किसानों ने रेलवे ट्रैक को 25 अक्तूबर से चार नवंबर तक खाली कर दिया था, ताकि मालगाड़ियां जरूरत की सामग्री लेकर पंजाब के विभिन्न हिस्सों तक लेकर सकें। इसके बाद केंद्र ने ट्रैक खाली न होने की बात कहकर मालगाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी। पंजाब में यूरिया का इस्तेमाल दिसंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो जाएगा। एक अनुमान के अनुसार, पंजाब में सात लाख टन डीएपी और 28 लाख टन यूरिया का प्रयोग किया जाता है।