पठानकोट एयरबेस कैंप पर आतंकवादी हमले की जांच में जुटी एनआईए की टीम का फोकस जहां बमियाल बार्डर की तरफ है।
वहीं बेस कैंप के भीतर और बाहरी सुरक्षा में लापरवाही की जांच भी शुरू हो गई है। एनआईए की टीम चार मुख्य बिंदुओं पर फोकस कर रही है। यह चारों एयरबेस में लापरवाही और कोताही के हैं।
दो जनवरी को शाम तक खुफिया एजेंसियों को पता चल गया था और आईबी व आर्मी इंटेलिजेंस ने क्लीयर कर दिया था कि आतंकवादी आ चुके हैं और उनका निशाना पठानकोट कैंट या फिर पठानकोट एयरबेस है।
इसके बावजूद संवेदनशील बेसकैंप में कमांडो की तैनाती क्यों नहीं की गई। बेस कैंप के चारों तरफ घेरा डालकर आर्मी क्यों नहीं लगाई गई। सुरक्षा डीएससी के हवाले ही क्यों रखी गई। अंदरूनी सुरक्षा को लेकर क्या ठोस कदम उठाया गया।
एयरबेस कैंप की फ्लड लाइटों और सुरक्षा लाइटों की है। एयरफोर्स स्टेशन का एक हिस्सा हिमाचल में पड़ता है और इस हिस्से में गांव बेली महंता के जाने वाले रास्ते में लगती बेसकैंप की लंबी दीवार के तीनों पावर बल्ब गायब हैं।
इंडिया का फाइटर एयरबेस और उसकी दीवार के तीनों पावर बल्ब गायब हों, यह सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है। यह खामी आतंकवादियों की मददगार बनी है।
इसके अलावा इस पर भी फोकस किया जा रहा है कि एयरबेस कैंप की दीवार पर लगे कंटीले तार जानबूझकर तो किसी ने नहीं काटे थे।
एयरबेस कैंप के 24 किलोमीटर के दायरे में गांव धीरा की तरफ का इलाका ऐसा है, जहां पर बिल्कुल सफाई नहीं करवाई गई।
आशंका है कि इसी इलाके में एमबी नाले की तरफ से आतंकवादी एयरबेस कैंप के भीतर घुसने में कामयाब हुए। एनआईए इस बात की भी जांच कर रही है कि एयरबेस कैंप के अंदर आतंकियों का मददगार कौन है। एनआईए को काफी इनपुट और सुराग मिल गए हैं और कड़ियों को आपस में जोड़ा जा रहा है।
एनआईए की टीम ने रविवार को एयरबेस कैंप के भीतर इन चारों प्वाइंट्स पर अपना होमवर्क किया और इसकी तह तक जाने का प्रयास किया जा रहा है।
रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने तो साफ ही कह दिया था कि एयरबेस कैंप की सुरक्षा व्यवस्था में कमजोरी और चूक हुई थी। एनआईए यह जांच कर रही है कि यह चूक लापरवाही थी या फिर एक साजिश का हिस्सा।