रेल डिवीजन फिरोजपुर में कोविड-19 फंड में हुए घोटाले की जांच के आदेश नॉर्दर्न रेलवे की एसडीजीएम (चीफ विजिलेंस अफसर) चंद्रलेखा मुखर्जी ने दे दिए हैं। विजिलेंस जांच की भनक लगने पर रेल मंडल कार्यालय फिरोजपुर के स्टोर विभाग के मुलाजिम सबूत मिटाने में जुटे हैं। जानकारों का कहना है कि सरकारी दो कंप्यूटर ऐसे हैं, जिन पर कई सप्लायर बैठकर कार्य करते हैं। इन कंप्यूटरों से भी सबूत मिटाने की प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस जांच शुरू होने की भनक लगने पर संबंधित विभाग में अफरातफरी मच गई है। कई सप्लायर सरकारी कंप्यूटर पर बैठकर कार्य करते हैं, जो अधिकारियों के चहेते हैं। जानकारों का कहना है कि रेलवे विजिलेंस या सीबीआई निष्पक्ष जांच करती है तो कोविड-19 फंड के अलावा कई घोटाले उजागर हो सकते हैं। ये धंधा दो साल से चलता आ रहा है। जांच में ये भी पता चलेगा कि किन सप्लायरों ने कितनी फर्में बना रखी है और दो साल में कितने करोड़ का कार्य किया है। जो सामग्री दी है, उसके कितने दाम वसूले हैं और क्या उसी कंपनी की वस्तु दी है जो मांगी गई थी, या फिर नकली, ये सब जांच में सामने आएगा। कोविड-19 फंड में से हुई खरीद-फरोख्त के कई दस्तावेज सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, उन्हें देख कर साफ हो चुका है कि फंड में लाखों का घोटाला हुआ है। क्योंकि दाम तीन से छह गुणा से भी ज्यादा वसूले गए हैं।
उधर, नॉर्दर्न रेलवे विजिलेंस की एसडीजीएम चंद्रलेखा मुखर्जी से संपर्क करने पर बताया कि रेल डिवीजन फिरोजपुर में कोविड-19 फंड में हुए घोटाले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मामले की बारीकी से जांच की जाएगी। चाहे आरोपी जितने भी सबूत मिटाने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि जांच में कोई भी अधिकारी या सप्लायर आरोपी पाया गया सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।