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सरकारी गलियारों में एक ही चर्चा, किसकी बनेगी सरकार, सियासत में हवा का रुख भांप रहे प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी

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पंजाब में मतदान संपन्न हो चुका है लेकिन सरकारी गलियारों में एक ही चर्चा रोजाना सुनने को मिल रही कि किसकी बनेगी सरकार? चाय की चुस्कियों के साथ दिन भर अधिकारी मतदान, सियासत में उलटफेर और जोड़तोड़ पर चर्चा करते दिखाई देते हैं। पंजाब में इतिहास इस बात का साक्षी है कि मतदान के बाद हवा का रुख साफ हो जाता था कि सरकार किसकी बनने जा रही है लेकिन इस बार अधिकारी माथा पकड़कर बैठे हैं कि पता नहीं किसकी सरकार बनेगी। कोई खिचड़ी सरकार कहता है तो कोई भाजपा की जोड़तोड़ वाली सरकार तो कोई आप की सरकार। लेकिन इन सबके बीच अधिकारी हवा का रुख भांप रहे हैं और किसी भी पार्टी के नेता को सलाम ठोकने से कतरा रहे हैं।
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दरअसल, पंजाब में हमेशा मुकाबला दो पार्टियों के बीच होता आया है, एक तरफ अकाली दल-भाजपा गठबंधन होता है तो दूसरी तरफ कांग्रेस। 1997 में पंजाब में आंधी साफ चल रही थी और तस्वीर साफ थी कि अकाली दल-भाजपा पंजाब में जबरदस्त सीटें हासिल कर रहा है। लिहाजा, लाल बत्ती वाले अधिकारियों ने गाड़ियों का रुख प्रकाश सिंह बादल की कोठी की तरफ कर लिया था और मतगणना से पहले ही उनको वीवीआईपी सुरक्षा व प्रोटोकॉल मुहैया करवा दिया गया था। 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार सत्तासीन हो रही है, इसकी तस्वीर भी साफ हो गई थी। अधिकारियों की एक टोली मतगणना से पहले ही कैप्टन को सैल्यूट मार आई थी।
2012 में तो मजेदार किस्सा हो गया, पंजाब में हवा का रुख व सर्वेक्षण बता रहे थे कि कैप्टन की सरकार पंजाब में बन रही है और एक डीजीपी रैंक का अधिकारी मतगणना से पहले ही कैप्टन अमरिंदर सिंह को मोती महल में मिल आया था। लेकिन सरकार अकाली दल-भाजपा की आ गई। 2017 में आम आदमी पार्टी की तरफ से पंजाब में अधिकारियों से बैठक का सिलसिला मतगणना से पहले ही शुरू कर दिया था।
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एक ईमानदार पुलिस अधिकारी ने बैठक कर सूची तैयार करनी शुरू कर दी थी कि पंजाब में किस पुलिस अधिकारी को कहां तैनात करना है? लेकिन आप की सरकार नहीं आई और पंजाब में कांग्रेस की सत्ता आ गई। इस बार पंजाब की फिजा से आवाज नहीं निकल रही है कि किसकी सरकार बनने जा रही है। लिहाजा प्रशासनिक अधिकारी भी फूंक फूंककर कदम रख रहे हैं। कई अधिकारी तो हर पार्टी के बड़े नेताओं से संपर्क बनाकर चल रहे हैं ताकि जिसकी भी सरकार बने, उसको बड़ा पद आसानी से मिल जाए।
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