आसमान को छू रहे आलू के भावों में अगले सप्ताह गिरावट आने के आसार हैं क्योंकि अगले सप्ताह आलू की नई फसल बाजार में आ जाएगी। बता दें कि इस साल आलू के दामों में काफी इजाफा देखने को मिला था। इसके दो मुख्य कारण है। पहला आलू की पैदावार इस साल कम हुईं है। दूसरा कारण यह है कि कई जगहों पर अब भी आलू की बिजाई जारी है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब में 2016-17 में 97 हजार हेक्टेयर और 2018-19 में 1.03 लाख हेक्टेयर में आलू की बिजाई हुई थी। साल 2018-19 में 27 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई थी। आलू की बंपर पैदावार होने के कारण किसानों को आलू पांच रुपये प्रति किलो से भी कम दाम पर बेचना पड़ा था। वहीं कुछ स्थानों पर तो किसानों ने आलू को मुफ्त में ही बांट दिया था। वहीं साल 2019-20 में 95790 हेक्टेयर में आलू की खेती हुई थी। इस साल करीब 20 लाख मीट्रिक टन आलू की पैदावार हुई है। जो पिछले साल के मुकाबले कम है।
आलू के थोक विक्रेता पवन तनेजा ने कहा कि अभी कुछ स्थानों पर आलू की बिजाई चल रही है और कहीं पर आलू की फसल तैयार हो चुकी है। एक सप्ताह के बाद फसल बाजार में आ जाएगी। इससे आलू के दामों में गिरावट हो सकती है।
आलू किसान तजिंदर सिंह का कहना है कि इन दिनों काफी छोटा आलू बतौर बीज दूसरे प्रदेशों में भेजा जा रहा है। इससे आलू की खपत और मांग में बढ़ोतरी हो गई है। आलू की पैदावार इस साल अच्छी होगी क्योंकि पिछले साल किसानों ने आलू से किनारा कर लिया था। इस बार काफी किसानों ने आलू की बिजाई की है।