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शहीद का सात वर्षीय बेटा बोला, मैं भी बनूंगा फौजी

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पठानकोट में शहीद हवलदार मदन लाल शर्मा को श्रद्धांजलि देते कुंवर रविंद्र विक्की, शहीद की पत्नी भा? - फोटो : PATHANKOT
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सात वर्षीय कन्नव ने रोते हुए मां भावना शर्मा को कहा कि मम्मी, पापा क्यों चले गए, उन्हें नहीं जाना चाहिए था। मुझे उनकी याद आती है। जब भी मैं पापा की वर्दी देखता हूं तो दिल यही कहता है कि मैं भी उनकी तरह फौजी बनकर देश सेवा करूंगा। नन्हें कन्नव की यह बातें सुन हर आंख नम हो उठी। मौका था कन्नव के पिता 20 डोगरा यूनिट के शहीद हवलदार मदन लाल शर्मा के चौथे श्रद्धांजिल समारोह का।
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कन्नव के पिता शहीद मदन लाल जम्मू-कश्मीर के नौगांव सेक्टर में आतंकियों से लड़ते हुए शहादत का जाम पी गए थे। उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से नवाजा गया। सोमवार को गांव घरोटा में वीर चक्र विजेता कैप्टन रघुनाथ सिंह की अध्यक्षता में करवाए इस कार्यक्रम में शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने बतौर मुख्य मेहमान शिरकत की। इसके अलावा शहीद की पत्नी भावना शर्मा, बेटी श्वेता, बेटा कन्नव शर्मा व अन्य लोग शामिल हुए। पिता की कमी के बावजूद बालपन में देश के प्रति जज्बा दिखाने वाले कन्नव के वाक्य सुनकर वहां मौजूद कर किसी की आंखें नम हो गई।
इस दौरान कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने कहा कि आज देशवासी आजादी की जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं, वो आजादी शहीद हवलदार मदन लाल शर्मा जैसे शूरवीरों के शौर्य व बलिदानों पर टिकी है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार के घर का चिराग राष्ट्र की बलिवेदी पर कुर्बान हो जाता है, वो परिवार जिंदा लाश बनकर रह जाता है। ऐसे में सरकारों के साथ-साथ समाज के अन्य लोगों का यह फर्ज बनता है कि इन परिवारों के रिसते जख्मों पर मरहम लगाकर उनका दुख दर्द बांटते हुए उनके जिगर के टुकड़ों की शहादत की गरिमा को बहाल रखें। वीर चक्र विजेता कैप्टन रघुनाथ सिंह ने कहा कि हवलदार मदन लाल शर्मा जैसे जांबाज भारतीय सेना के गौरव हैं, जिनके बलिदान से सेना के जवान हमेशा प्रेरणा लेते रहेंगे। परिषद ने शहीद के परिजनों को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया।
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