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लखबीर हत्याकांड: किसान संगठनों व निहंगों में बढ़ने लगीं दूरियां, गुरमीत सिंह पिंकी की एंट्री ने खड़ा किया नया विवाद

Tue, 19 Oct 2021 10:45 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

लखबीर सिंह की हत्या का राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन विजय सांपला ने कड़ा संज्ञान लिया और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को पत्र भी लिखा लेकिन पंजाब में कोई भी संगठन लखबीर के लिए खड़ा नहीं हुआ।
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कृषि मंत्री के साथ वायरल हुई तस्वीर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सिंघु बार्डर पर लखबीर हत्याकांड के बाद कई सवाल ऐसे उठने शुरू हो गए हैं, जिससे तस्वीर साफ होने लगी है कि हत्याकांड एक सुनियोजित योजना थी। चार दिन से खुफिया व केंद्रीय एजेंसियां यह खोज नहीं पाई थी कि संधू साहब कौन है? जिनकी बात लगातार लखबीर सिंह से होती थी लेकिन इस बीच पंजाब पुलिस के सजायाफ्ता इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह पिंकी की एंट्री ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। 

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लखबीर हत्याकांड के बाद सिख समाज के लोग भी आपस में बंटने लगे हैं। वहीं किसान संगठनों व निहंग सिंह में भी दूरियां बढ़ने लगी है। सिख प्रचारक संत ढंडरियां वाला खुलकर निहंग सिंह के खिलाफ आ गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक निहंगों ने एक भी वीडियो जारी नहीं की जिससे साफ हो कि वहां पर बेअदबी हुई है। 

पहले कहा जा रहा था कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब की बेअदबी हुई है, अब कहा जा रहा है सर्वलोह पोथी साहिब की बेअदबी की कोशिश हुई है। ढंडरियां वाला ने तो इतना भी कहा कि सभी निहंग सिंहों के बयान भी आपस में मेल नहीं खाते। अभी तक प्रदेश पुलिस व केंद्रीय एजेंसियां इस बात का खुलासा नहीं कर पाई है कि लखबीर सिंह निहंग सिंह वेशभूषा में कैसे सिंघु बार्डर पर निहंग सिंह की छावनी में एंट्री ली। इस पर अभी जांच नहीं शुरु हुई है। जो लखबीर अमृतसर तक नहीं गया वह दिल्ली बार्डर कैसे पहुंचा ?

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निहंगों को किसान आंदोलन से हटाने की मांग भी अब तेज होने लगी है। जिसके बाद निहंग संगठनों ने 27 अक्टूबर को सिंघु बॉर्डर पर ही धार्मिक एकत्रता या कहे तो महापंचायत बुलाई है। इस बैठक में जनमत संग्रह के आधार पर फैसला लिया जाएगा कि उन्हें कृषि कानून विरोधी प्रदर्शन से वापस जाना चाहिए या नहीं। इसमें निहंगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर भी मंथन किया जाएगा।

सिंघु बॉर्डर पर बैठी निहंग जत्थेबंदियों के प्रमुखों में शामिल निहंग राजा राम सिंह को किसान आंदोलन के नेताओं पर सवाल खड़े किए। राजा राम सिंह ने साफ कहा कि हम न तो धर्म के साथ बेअदबी बर्दाश्त करेंगे और न ही किसी का मनमाना दखल, इन सभी मुद्दों पर 27 को फैसला होगा। 

कातिल पिंकी कैसे पहुंचा केंद्रीय मंत्री के पास
साल 2001 में गुरमीत पिंकी पर लुधियाना में अवतार सिंह उर्फ गोला की हत्या का आरोप लगा। जिस मामले में अक्टूबर 2006 में उसे उम्रकैद हुई और पुलिस से निकाल दिया गया। करीब आठ साल सजा काटने के बाद अच्छे व्यवहार की बात कह सरकार ने उसे रिहा कर दिया। 

2014 में रिहा होने के बाद मई 2015 में गुरमीत को फिर से पंजाब पुलिस में नियुक्त करने के निर्देश दिए गए। हालांकि विवाद होने पर इस फैसले को चार दिन बाद ही रद्द करना पड़ा। गुरमीत पिंकी के विरोधी उस पर आतंकी संगठन बब्बर खालसा से संबंध होने के आरोप लगाते रहे। केंद्र सरकार विवादों में घिर गई है। 
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निहंग बाबा अमन सिंह के साथ फोटो सामने आने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री पर सवाल उठ रहा है कि वो किस तरह के लोगों के जरिए किसानों से बातचीत कर रहे हैं। सियासी तौर पर तो आरोप हैं ही लेकिन अब यह आम चर्चा उठ रही है कि कत्ल केस में सजा काट चुका व्यक्ति केंद्रीय कृषि मंत्री के इतने करीब कैसे पहुंच गया। 

एजेंसियों की साजिश, आंदोलन तोड़ने की कोशिश
पंजाबी जागृति मंच के वरिष्ठ लेखक सतनाम सिंह माणक का कहना है कि एजेंसियों की कोशिश है कि किसी तरह से आंदोलन को तोड़ा जाए और उसमें अपने लोगों की घुसपैठ करवाकर आंदोलन को फेल किया जाता है। सिंघु बार्डर पर लखबीर सिंह की हत्या की जांच होनी चाहिए और सच सामने लाना चाहिए।
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