निहंगों को किसान आंदोलन से हटाने की मांग भी अब तेज होने लगी है। जिसके बाद निहंग संगठनों ने 27 अक्टूबर को सिंघु बॉर्डर पर ही धार्मिक एकत्रता या कहे तो महापंचायत बुलाई है। इस बैठक में जनमत संग्रह के आधार पर फैसला लिया जाएगा कि उन्हें कृषि कानून विरोधी प्रदर्शन से वापस जाना चाहिए या नहीं। इसमें निहंगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर भी मंथन किया जाएगा।
सिंघु बॉर्डर पर बैठी निहंग जत्थेबंदियों के प्रमुखों में शामिल निहंग राजा राम सिंह को किसान आंदोलन के नेताओं पर सवाल खड़े किए। राजा राम सिंह ने साफ कहा कि हम न तो धर्म के साथ बेअदबी बर्दाश्त करेंगे और न ही किसी का मनमाना दखल, इन सभी मुद्दों पर 27 को फैसला होगा।
कातिल पिंकी कैसे पहुंचा केंद्रीय मंत्री के पास
साल 2001 में गुरमीत पिंकी पर लुधियाना में अवतार सिंह उर्फ गोला की हत्या का आरोप लगा। जिस मामले में अक्टूबर 2006 में उसे उम्रकैद हुई और पुलिस से निकाल दिया गया। करीब आठ साल सजा काटने के बाद अच्छे व्यवहार की बात कह सरकार ने उसे रिहा कर दिया।
2014 में रिहा होने के बाद मई 2015 में गुरमीत को फिर से पंजाब पुलिस में नियुक्त करने के निर्देश दिए गए। हालांकि विवाद होने पर इस फैसले को चार दिन बाद ही रद्द करना पड़ा। गुरमीत पिंकी के विरोधी उस पर आतंकी संगठन बब्बर खालसा से संबंध होने के आरोप लगाते रहे। केंद्र सरकार विवादों में घिर गई है।
निहंग बाबा अमन सिंह के साथ फोटो सामने आने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री पर सवाल उठ रहा है कि वो किस तरह के लोगों के जरिए किसानों से बातचीत कर रहे हैं। सियासी तौर पर तो आरोप हैं ही लेकिन अब यह आम चर्चा उठ रही है कि कत्ल केस में सजा काट चुका व्यक्ति केंद्रीय कृषि मंत्री के इतने करीब कैसे पहुंच गया।
एजेंसियों की साजिश, आंदोलन तोड़ने की कोशिश
पंजाबी जागृति मंच के वरिष्ठ लेखक सतनाम सिंह माणक का कहना है कि एजेंसियों की कोशिश है कि किसी तरह से आंदोलन को तोड़ा जाए और उसमें अपने लोगों की घुसपैठ करवाकर आंदोलन को फेल किया जाता है। सिंघु बार्डर पर लखबीर सिंह की हत्या की जांच होनी चाहिए और सच सामने लाना चाहिए।