जून 1985 को हुआ था ब्लास्ट
23 जून 1985 को कनाडा से भारत आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट 182 में आयरलैंड के तट के पास हवा में ब्लास्ट हो गया था। हादसे में विमान सवार सभी 329 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर भारत में अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रहे कनाडाई नागरिक थे। उसी समय जापान में एयरपोर्ट पर एक बम फट गया था, जिसमें दो हैंडलर मारे गए। इस हमले की योजना कनाडा में मौजूद सिख चरमपंथियों ने बनाई थी। इस मामले में मलिक को आरोपी बनाया गया था। हालांकि उसे और सह-अभियुक्त अजायब सिंह बागरी को 2005 में बरी कर दिया गया था।
हरदीप निज्जर से था विवाद
हत्या से पहले मलिक खालसा कॉलेज शुरू करने जा रहे थे और इसके लिए बाकायदा जत्थेदार को बुलाया गया था। रिपुदमन सिंह ने एक चैनल को इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर और मनिंदर बॉयल को ‘बुलिश’ (आपत्तिजनक शब्द) कहा था। इसके बाद एक धार्मिक कार्यक्रम में हरदीप सिंह निज्जर ने रिपुदमन को कौम का गद्दार कहा था और तमाम लोगों को कहा था कि वह रिपुदमन को सबक सिखाएं।
मोदी समर्थक थे मलिक
मलिक एक बिजनेसमैन थे, जिन्होंने खालसा क्रेडिट यूनियन और खालसा स्कूल की स्थापना की थी। वह केंद्र सरकार व पीएम मोदी के कट्टर समर्थक थे। कनाडा की पुलिस इसे भी हत्या का एक कारण मान रही है। इसके अलावा श्री गुरुग्रंथ साहिब जी की छपाई को भी रिपुदमन की हत्या का एक कारण माना जा रहा है। हालांकि बाद में यह मामला श्री अकाल तख्त साहिब तक पहुंचा, जिसके बाद रिपुदमन ने छपाई बंद कर दी और सभी स्वरूप शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सौंप दिए थे। श्री गुरुग्रंथ साहिब जी को कोई भी अपनी इच्छानुसार नहीं छाप सकता है। पूरी दुनिया में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की प्रिंटिंग सिर्फ अमृतसर में ही होती है।
रिपुदमन की हत्या टारगेट किलिंग है और इसकी पूरी योजना तैयार कर इसको अमली जामा पहनाया गया है। वहीं ये भी सवाल उठा कि क्या मलिक की हत्या पाकिस्तान के आतंकी संगठन ने तो नहीं करवाई, क्योंकि रिपुदमन ने कुछ कट्टरपंथियों का भंडाफोड़ करने की धमकी दी थी।